नई दिल्ली। नौकरी के बदले जमीन घोटाले की जांच में नामजद राष्ट्रीय जनता दल (राजद) अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव और उनकी पत्नी राबड़ी देवी ने दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट से व्यक्तिगत पेशी से छूट मांगी है। इसी क्रम में उनके बेटे तेजस्वी यादव और तेज प्रताप यादव ने भी कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से हाजिर होने से छूट के लिए अर्जी दाखिल की है। यह मामला केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा दर्ज किया गया है और इसमें भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप शामिल हैं। कोर्ट इन याचिकाओं पर सुनवाई कर अपना निर्णय देगी।
केस में फोकस तेजस्वी यादव पर
रेलवे में नौकरी के बदले जमीन घोटाले के आरोप पत्र दाखिल होने के बाद पहली बार कोर्ट में लालू परिवार की भूमिका पर सुनवाई हुई। आरोप पत्र में प्रथम दृष्टया संकेत दिए गए कि इस मामले में लालू परिवार का एक नेटवर्क शामिल था। हालांकि, राजनीतिक और मीडिया नजरें सबसे अधिक तेजस्वी यादव पर हैं। तेजस्वी को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का समन जारी किया गया है। उनके ऊपर ध्यान इसलिए भी है क्योंकि वे राजद के कार्यकारी अध्यक्ष हैं, महागठबंधन में अहम भूमिका निभाते हैं और पिछले चुनाव में मुख्यमंत्री पद की दावेदारी भी कर चुके हैं।
1 से 15 फरवरी के बीच सशरीर हाजिरी, 9 मार्च से नियमित सुनवाई
गुरुवार की सुनवाई में लालू की बड़ी बेटी और पाटलिपुत्र सांसद मीसा भारती तथा उनकी बहन हेमा यादव कोर्ट में उपस्थित रहीं, जबकि बाकी परिवार के सदस्य नहीं आए। अदालत ने आदेश जारी किया कि लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव 1 से 15 फरवरी के बीच व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में हाजिर हों।
कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि अब किसी भी प्रकार की ढील नहीं दी जाएगी। इसके साथ ही अदालत ने 9 मार्च से इस मामले की नियमित सुनवाई शुरू करने का निर्देश दिया है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि रेगुलर सुनवाई शुरू होने के बाद इस केस का फैसला अपेक्षाकृत जल्दी आ सकता है, जो चुनावी वर्ष में राजद की राजनीतिक चुनौती बढ़ा सकता है।