नई दिल्ली: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ प्रस्तुत अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान सदन को संबोधित करते हुए कहा कि यह कोई साधारण घटना नहीं है। उन्होंने याद दिलाया कि लगभग चार दशक के बाद किसी लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश किया गया है।

इस अवसर पर अमित शाह ने विपक्ष द्वारा माइक बंद करने के आरोपों का जवाब भी दिया। उन्होंने कहा कि नियमों का पालन करना सभी सदस्यों के लिए अनिवार्य है। उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि पप्पू यादव के भाषण के दौरान गिरिराज सिंह का भी माइक बंद कर दिया गया था। उनका कहना था कि मंत्री हों या सदस्य, नियमों के विपरीत बोलने पर माइक बंद होना ही चाहिए।

अनुशासन पर जोर

अमित शाह ने स्पष्ट किया कि अनुशासन तोड़ने पर माइक बंद होना उचित है। उन्होंने कहा, “जब स्पीकर किसी सदस्य को किसी विशेष मुद्दे पर बोलने का अवसर देते हैं और वह किसी अन्य विषय पर बोलने लगे, तो माइक बंद होना ही स्वाभाविक है।”

उन्होंने यह भी कहा कि अविश्वास प्रस्ताव पर बीएसी में तय हुआ कि चर्चा नौ तारीख को होगी, लेकिन विपक्ष इस पर गंभीर नहीं दिखा। उनका दावा था कि 80 फीसदी से अधिक भाषण स्पीकर के कंडक्ट पर नहीं, बल्कि सरकार का विरोध करने के लिए किया गया।

कांग्रेस को विरोध का अधिकार?

अमित शाह ने कांग्रेस पर भी निशाना साधा और कहा कि सरकार का विरोध करने के लिए कई कानूनी धाराएं मौजूद हैं, लेकिन स्पीकर की गरिमा पर सवाल उठाना उचित नहीं। उन्होंने बताया कि कांग्रेस ने अपने डिप्टी स्पीकर नियुक्त कर दिए थे और अब यह सवाल उठा रही है कि उनके अधिकारों का उल्लंघन हुआ। अमित शाह ने कहा, “हमने कम से कम आपके लिए पद खाली रखा, आपने तो अपनी ओर से भी खाली नहीं छोड़ा।”

इस प्रकार गृह मंत्री ने न केवल अविश्वास प्रस्ताव पर विपक्ष को कड़ा जवाब दिया, बल्कि लोकसभा में अनुशासन और नियमों के पालन पर भी जोर दिया।