कोलकाता। पश्चिम बंगाल में चुनावी सरगर्मी के बीच भवानीपुर विधानसभा क्षेत्र का एक मामला राजनीतिक विवाद का कारण बन गया है। वार्ड नंबर 70 के अंतर्गत एक आश्रम में साधुओं के साथ कथित दुर्व्यवहार और मारपीट के आरोप सामने आए हैं, जिसके बाद राज्य की राजनीति एक बार फिर गर्मा गई है।
भाजपा उम्मीदवार और विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी ने इस घटना को लेकर तृणमूल कांग्रेस समर्थकों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि शुक्रवार को पद्मपुकुर इलाके में स्थित एक आश्रम में रह रहे साधु-संतों के साथ बदसलूकी की गई और उन्हें परिसर से बाहर निकाला गया।
सुवेंदु अधिकारी के अनुसार, आश्रम में रह रहे साधु कालीघाट और आसपास के क्षेत्रों में सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार से जुड़े कार्य कर रहे थे, तभी उनके साथ यह घटना हुई। उन्होंने आरोप लगाया कि स्थानीय टीएमसी पार्षद असीम बसु अपने समर्थकों के साथ मौके पर पहुंचे और साधुओं को धमकाया गया, साथ ही उनके मोबाइल फोन छीनने और आश्रम की बिजली-पानी आपूर्ति बाधित करने जैसे कदम उठाए गए।
एक साधु ने भी दावा किया कि घटना के बाद उनका सामान्य जीवन प्रभावित हुआ है और दैनिक गतिविधियों में कठिनाई आ रही है।
सुवेंदु अधिकारी ने इस घटना पर सवाल उठाते हुए कहा कि क्या भवानीपुर में धार्मिक प्रचार करना अब अपराध बन गया है। उन्होंने बिना नाम लिए राज्य सरकार पर सत्ता के दुरुपयोग और धार्मिक भावनाओं को दबाने का आरोप लगाया।
वहीं, तृणमूल कांग्रेस की ओर से इन आरोपों को पूरी तरह से खारिज किया गया है। वार्ड 70 के टीएमसी पार्षद असीम बसु का कहना है कि स्थानीय लोगों की शिकायत पर कार्रवाई की गई थी, क्योंकि कुछ साधु घर-घर जाकर लोगों की तस्वीरें ले रहे थे, जिससे खासकर महिलाओं में असहजता की स्थिति पैदा हो रही थी। उन्होंने कहा कि वह केवल शिकायत मिलने के बाद मौके पर पहुंचे थे।