नई दिल्ली। देश में परिवहन व्यवस्था को अधिक सरल और एकीकृत बनाने के प्रयासों के बीच केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय परिवहन नीति तैयार करने की दिशा में कदम बढ़ा दिए हैं। अलग-अलग राज्यों के परिवहन नियमों के कारण उत्पन्न होने वाली दिक्कतों को देखते हुए यह पहल की जा रही है, जिसे कई राज्य पहले भी केंद्र के समक्ष उठा चुके हैं।
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने इस प्रस्तावित नीति पर काम शुरू कर दिया है, जिसका प्रमुख उद्देश्य राज्यों के बीच परिवहन से जुड़े नियमों और टैक्स प्रणाली में अधिक समानता लाना बताया जा रहा है। इस विषय पर राज्यों से सुझाव भी मांगे गए हैं।
परिवहन संविधान के अनुसार राज्य सूची का विषय है, लेकिन इसके बावजूद केंद्र और राज्यों के बीच समन्वय बनाए रखने के लिए मंत्रालय समय-समय पर ट्रांसपोर्ट डेवलपमेंट काउंसिल की बैठक आयोजित करता है, जिसमें विभिन्न नीतिगत मुद्दों पर चर्चा होती है।
हाल ही में मंत्रालय ने पिछली बैठक का कार्यवृत्त साझा किया, जिसमें राष्ट्रीय परिवहन नीति को एक महत्वपूर्ण एजेंडा के रूप में शामिल किया गया है। इसमें बताया गया कि विभिन्न परिवहन संगठनों ने सभी राज्यों में मोटर व्हीकल टैक्स को एक समान करने की मांग उठाई है।
इस पर केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया कि चूंकि परिवहन राज्य का विषय है, इसलिए इसे सीधे तौर पर एक समान लागू करना संभव नहीं है। हालांकि, राज्यों की सहमति के आधार पर इस दिशा में आगे बढ़ा जा सकता है और इसे प्रस्तावित राष्ट्रीय परिवहन नीति में शामिल किया जा सकता है।
सरकार ने यह भी जानकारी दी है कि जीएसटी जैसी एकीकृत व्यवस्था के आधार पर मोटर व्हीकल टैक्स को समान बनाने पर विचार के लिए पांच राज्यों के परिवहन सचिवों से रिपोर्ट मांगी गई है।
वहीं, राज्यों की ओर से निजी और सार्वजनिक परिवहन में भेदभाव, अलग-अलग नियमों और टैक्स संरचना जैसी समस्याएं उठाए जाने पर केंद्र ने भरोसा दिलाया है कि सभी सुझावों को ध्यान में रखते हुए एक व्यावहारिक और सहमति आधारित राष्ट्रीय परिवहन नीति तैयार की जाएगी।