नई दिल्ली। कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर जातीय जनगणना को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। पार्टी का कहना है कि इस घोषणा को एक साल पूरा हो चुका है, लेकिन अब तक यह स्पष्ट नहीं है कि इसे जमीन पर कैसे लागू किया जाएगा।
कांग्रेस के संचार प्रभारी महासचिव जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जातीय जनगणना की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के बजाय इसे टालने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि ठीक एक साल पहले सरकार ने आगामी जनगणना में जातीय आंकड़ों को शामिल करने की बात कही थी, लेकिन उसके बाद कोई ठोस प्रगति नहीं हुई।
जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक विस्तृत पोस्ट साझा करते हुए कहा कि सरकार के इस फैसले के पीछे लगातार बदलता रुख रहा है। उन्होंने 2021 का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय गृह मंत्रालय ने संसद में जवाब दिया था कि जातिवार जनगणना कराने का कोई निर्णय नहीं लिया गया है। इसी साल बाद में केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा देकर कहा था कि इस तरह की जनगणना अदालत के निर्देश से सरकार की नीति में हस्तक्षेप मानी जाएगी।
कांग्रेस नेता ने यह भी बताया कि अप्रैल 2023 में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर जातीय जनगणना को राष्ट्रीय जनगणना के साथ कराने की मांग की थी। इसके बावजूद, अप्रैल 2024 में दिए गए एक इंटरव्यू में प्रधानमंत्री ने जातीय जनगणना की मांग को लेकर तीखी टिप्पणी की थी, जिसे कांग्रेस ने आपत्तिजनक बताया।
जयराम रमेश ने यह भी कहा कि हाल ही में अप्रैल 2025 में जातीय जनगणना की घोषणा के बावजूद अब तक न तो इसकी रूपरेखा सामने आई है और न ही किसी राज्य सरकार या विशेषज्ञ से चर्चा की गई है।
कांग्रेस का आरोप है कि सरकार इस मुद्दे पर स्पष्टता देने से बच रही है और जानबूझकर प्रक्रिया को आगे नहीं बढ़ा रही है। पार्टी ने दावा किया कि संसद के हालिया विशेष सत्र के बाद यह और स्पष्ट हो गया है कि सरकार की मंशा इसे लेकर गंभीर नहीं है।