बागपत में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के तहत राशन सप्लाई को लेकर गंभीर गड़बड़ी के आरोप सामने आए हैं। आरोप है कि एफसीआई गोदाम से राशन डीलरों तक पहुंचने वाले खाद्यान्न की सप्लाई में भारी हेरफेर किया जा रहा है, जिससे हर महीने सैकड़ों क्विंटल राशन कथित तौर पर गायब हो रहा है।
सूत्रों के अनुसार, मेरठ से बागपत के चमरावल मार्ग स्थित गोदाम तक आने वाला गेहूं और चावल ट्रकों के जरिए गांव-गांव तक भेजा जाता है। इसी दौरान कथित तौर पर ट्रकों में राशन की मात्रा कम कर दी जाती है और वजन संतुलित दिखाने के लिए पत्थर और इंटरलॉकिंग ईंटें छिपाकर रखी जाती हैं।
बताया जा रहा है कि ट्रकों में चालक के केबिन के पीछे बनाए गए गुप्त बॉक्स में ये सामग्री रखी जाती है। धर्मकांटे पर तौल के समय पत्थरों का वजन शामिल होने से सप्लाई पूरी दिखाई देती है, लेकिन डीलरों तक पहुंचने पर वास्तविक कमी सामने आती है।
जिले में करीब 376 राशन दुकानें संचालित हैं, जहां हर महीने एफसीआई से गेहूं और चावल सप्लाई किया जाता है। आरोप है कि सप्लाई चेन में हर महीने लगभग 500 से 600 क्विंटल राशन कम पहुंच रहा है, जिसका सीधा असर कार्डधारकों पर पड़ रहा है।
राशन वितरण 8 से 15 तारीख के बीच किया जाता है। इसी अवधि से पहले गोदाम से ट्रकों के जरिए राशन गांवों में भेजा जाता है, जहां जौहड़ी, आरिफपुर खेड़ी और अंगदपुर जैसे क्षेत्रों के डीलरों को सप्लाई दी जाती है। इन तीनों स्थानों पर ही कथित रूप से गड़बड़ी का खेल ज्यादा सामने आता है।
आरोप है कि धर्मकांटे पर तौल सही दिखाने के बाद ट्रक जब डीलरों की दुकानों पर पहुंचते हैं, तो 1.5 से 2 क्विंटल तक गेहूं और चावल कम निकलता है। शिकायतों से बचने के लिए कभी-कभी बोरों को फाड़कर सामग्री बिखेर दी जाती है, जिससे कमी का पता न चल सके।
डीलरों का कहना है कि कम राशन आने का सीधा असर कार्डधारकों पर पड़ता है, क्योंकि वितरण प्रणाली में यूनिट के आधार पर राशन दिया जाता है और अक्सर कम मात्रा में ही आपूर्ति करनी पड़ती है।
मामले को लेकर बागपत के राशन डीलर संगठन ने प्रशासन से शिकायत की है। संगठन का कहना है कि लंबे समय से शिकायतें की जा रही हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
वहीं जिला पूर्ति अधिकारी का कहना है कि मामला गंभीर है और प्रारंभिक जानकारी के आधार पर जांच शुरू कर दी गई है। जांच के बाद दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।