बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले चरण से पहले राजनीतिक माहौल काफी गर्म हो गया है। इसी बीच इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया द्वारा कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को जारी नोटिस ने सियासी हलचल और तेज कर दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर दिए गए उनके विवादित बयान पर आयोग ने उनसे स्पष्टीकरण मांगा है।
इस कार्रवाई के बाद कांग्रेस ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाए हैं। पार्टी का आरोप है कि आयोग अब स्वतंत्र संवैधानिक संस्था की तरह काम नहीं कर रहा, बल्कि केंद्र सरकार के प्रभाव में दिखाई दे रहा है।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने भी इस मुद्दे पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग की कार्यशैली पर गंभीर चिंताएं खड़ी हो गई हैं। उनके मुताबिक, आयोग को निष्पक्ष रहना चाहिए, लेकिन हाल के फैसलों से ऐसा प्रतीत नहीं होता।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए रमेश ने आरोप लगाया कि आयोग सरकार के दबाव में काम कर रहा है और इससे लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता प्रभावित हो रही है। उन्होंने इसे संविधान की भावना के विपरीत बताया।
विवाद की शुरुआत खरगे के उस बयान से हुई, जो उन्होंने चेन्नई में एक कार्यक्रम के दौरान दिया था। अपने भाषण में उन्होंने प्रधानमंत्री पर सरकारी एजेंसियों के जरिए विपक्ष पर दबाव बनाने का आरोप लगाया और एक टिप्पणी की, जिसे लेकर विवाद खड़ा हो गया।
हालांकि, बयान के बाद खरगे ने अपनी सफाई भी दी। उन्होंने कहा कि उनका आशय व्यक्तिगत टिप्पणी करना नहीं था, बल्कि वे लोकतांत्रिक संस्थाओं पर दबाव बनाए जाने के मुद्दे को उठाना चाहते थे।
इस बीच भाजपा की शिकायत के आधार पर चुनाव आयोग ने खरगे को 24 घंटे के भीतर जवाब देने को कहा है। खास बात यह है कि यह नोटिस उस समय जारी किया गया है जब तमिलनाडु में मतदान और पश्चिम बंगाल में पहले चरण के चुनाव बेहद नजदीक हैं, जिसे लेकर कांग्रेस ने समय पर भी सवाल उठाए हैं।