रक्षा मंत्रालय की शीर्ष खरीद संस्था रक्षा अधिग्रहण परिषद (डीएसी) की बैठक में भारतीय सशस्त्र बलों की क्षमताएं बढ़ाने से जुड़े कई अहम प्रस्तावों पर विचार किया गया। सूत्रों के मुताबिक, बैठक का मुख्य फोकस स्वदेशी रक्षा प्रणालियों को मंजूरी देने पर रहा। इनमें दिल्ली-एनसीआर को संभावित हवाई हमलों से सुरक्षित रखने के लिए विकसित की जा रही एकीकृत स्वदेशी वायु रक्षा हथियार प्रणाली भी शामिल है।
सेना की ड्रोन युद्ध क्षमता को मजबूत करने के उद्देश्य से रक्षा मंत्रालय लगभग 850 लॉइटरिंग मुनिशन्स की खरीद को मंजूरी दे सकता है। वहीं, भारतीय नौसेना के लिए अपने युद्धपोतों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए स्वदेशी माध्यम से मध्यम दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणालियों की बड़ी खरीद पर भी चर्चा की संभावना है।
बैठक में भारत द्वारा अमेरिका से दो सी गार्जियन MQ-9B HALE ड्रोन को लगभग तीन वर्षों के लिए लीज पर लेने के प्रस्ताव पर भी निर्णय लिया जा सकता है। उल्लेखनीय है कि भारत पहले ही 31 ऐसे ड्रोन खरीदने का करार कर चुका है, जिनकी आपूर्ति 2028 से शुरू होने की उम्मीद है।
भारतीय वायु सेना की ताकत बढ़ाने के लिए 200 किलोमीटर से अधिक दूरी तक मार करने वाली एस्ट्रा मार्क-2 वायु-से-वायु मिसाइलों के विकास और खरीद को भी मंजूरी मिलने की संभावना है। इसके साथ ही सीमित संख्या में मेटियोर मिसाइलों की खरीद पर भी विचार किया जा रहा है।
सेना ने रक्षा क्षेत्र की सार्वजनिक इकाई के माध्यम से करीब 200 टी-90 टैंकों के स्वदेशी अपग्रेड का प्रस्ताव भी रखा है। इसके अलावा वायु सेना के लिए इस्राइल से स्पाइस-1000 वायु-से-जमीन मिसाइलों की खरीद पर भी बैठक में चर्चा हो सकती है।
इस्राइल एयरक्राफ्ट इंडस्ट्रीज को एकमात्र आपूर्तिकर्ता मानते हुए छह मिड-एयर रिफ्यूलर विमानों की खरीद के प्रस्ताव पर भी विचार किया जाएगा। साथ ही रक्षा अधिग्रहण परिषद द्वारा 120 किलोमीटर तक मारक क्षमता वाले पिनाका रॉकेटों के विकास को हरी झंडी दिए जाने की संभावना है, जिन्हें मौजूदा 45 और 80 किलोमीटर रेंज वाले रॉकेटों के लिए इस्तेमाल होने वाले एक ही लॉन्चर से दागा जा सकेगा।