नई दिल्ली। भारतीय सेना के वरिष्ठ अधिकारी जनरल एन.एस. राजा सुब्रमणि ने रविवार को देश के नए चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) के रूप में औपचारिक रूप से कार्यभार संभाल लिया। वे जनरल अनिल चौहान के स्थान पर यह जिम्मेदारी संभाल रहे हैं, जिनका कार्यकाल पूरा होने के बाद वे सेवानिवृत्त हुए।

रक्षा क्षेत्र में व्यापक अनुभव रखने वाले जनरल सुब्रमणि को चीन और पाकिस्तान से जुड़े रणनीतिक मामलों का विशेषज्ञ माना जाता है। उनके सामने अब तीनों सेनाओं—थल सेना, नौसेना और वायुसेना—के बीच समन्वय को और मजबूत करने की बड़ी जिम्मेदारी होगी।

‘मिलिट्री थिएटराइजेशन’ और संयुक्त रणनीति पर फोकस

कार्यभार संभालने के बाद CDS सुब्रमणि की प्राथमिकताओं में सबसे ऊपर सेना के आधुनिकीकरण और प्रस्तावित “मिलिट्री थिएटराइजेशन” योजना को लागू करना है। इसका उद्देश्य तीनों सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल और एकीकृत कमान संरचना विकसित करना है।

उन्होंने प्रधानमंत्री के “JAI विजन” (जॉइंटनेस, आत्मनिर्भरता और इनोवेशन) को लागू करने की प्रतिबद्धता जताई।

आत्मनिर्भर रक्षा प्रणाली पर जोर

जनरल सुब्रमणि ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा का आधार आत्मनिर्भरता है। उन्होंने संकेत दिया कि आने वाले समय में स्वदेशी रक्षा उत्पादन को बढ़ावा दिया जाएगा और सेना में आधुनिक तकनीक एवं हथियारों के समावेश को गति दी जाएगी।

उन्होंने यह भी कहा कि सेना, रक्षा उद्योग, स्टार्टअप, शिक्षण संस्थान और शोध क्षेत्र के बीच सहयोग को मजबूत किया जाएगा ताकि नवाचार को बढ़ावा मिले।

जवानों और पूर्व सैनिकों के कल्याण पर प्राथमिकता

CDS ने स्पष्ट किया कि जवानों की ट्रेनिंग, उनका कल्याण और पूर्व सैनिकों तथा वीर नारियों का सम्मान उनकी प्राथमिकताओं में शामिल रहेगा। उन्होंने देश की सुरक्षा के लिए बलिदान देने वाले शहीदों को श्रद्धांजलि भी दी।

लंबा और विविध सैन्य अनुभव

जनरल एन.एस. राजा सुब्रमणि का सैन्य करियर 40 वर्षों से अधिक का रहा है। उन्होंने विभिन्न क्षेत्रों और महत्वपूर्ण सैन्य अभियानों में नेतृत्व किया है।

वे 2024 से 2025 तक थल सेना के उप प्रमुख रहे और इससे पहले मध्य कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ भी रह चुके हैं। उन्होंने राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (NDA) और भारतीय सैन्य अकादमी (IMA) से प्रशिक्षण प्राप्त किया है।

1985 में उन्हें गढ़वाल राइफल्स में कमीशन मिला था। अपने करियर के दौरान उन्होंने ऑपरेशन राइनो, जम्मू-कश्मीर और मध्य क्षेत्र में कई अहम कमांड संभालीं।

प्रतिष्ठित सैन्य सम्मान

उनकी सेवाओं के लिए उन्हें परम विशिष्ट सेवा पदक, अति विशिष्ट सेवा पदक, सेना पदक और विशिष्ट सेवा पदक जैसे कई प्रतिष्ठित सम्मान मिल चुके हैं।