कोलकाता। पश्चिम बंगाल में हाल के दिनों में सामने आई राजनीतिक हिंसा की घटनाओं को लेकर सियासी माहौल गर्म हो गया है। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के नेताओं अभिषेक बनर्जी और कल्याण बनर्जी के साथ हुई कथित घटनाओं के बाद आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। एक ओर टीएमसी इन घटनाओं के लिए भाजपा को जिम्मेदार ठहरा रही है, वहीं भाजपा नेताओं ने इन आरोपों को खारिज करते हुए पलटवार किया है।

अभिषेक के आरोपों पर भाजपा का जवाब

टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी ने हालिया घटनाओं के पीछे भाजपा की भूमिका होने का आरोप लगाया था। उनके इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा नेता दिलीप घोष ने तीखे शब्दों में जवाब दिया। उन्होंने कहा कि भाजपा पर लगाए जा रहे आरोप निराधार हैं और राजनीतिक लाभ के लिए इस तरह के दावे किए जा रहे हैं।

घोष ने कहा कि उनकी पार्टी कानून-व्यवस्था के दायरे में रहकर काम करने में विश्वास रखती है और किसी भी तरह की हिंसा का समर्थन नहीं करती। उन्होंने राज्य में लंबे समय से राजनीतिक हिंसा के मुद्दे को उठाते हुए टीएमसी सरकार पर भी सवाल खड़े किए।

राजनीतिक हिंसा को लेकर आरोप

दिलीप घोष ने दावा किया कि पिछले कई वर्षों से राज्य में राजनीतिक हिंसा की घटनाएं सामने आती रही हैं और आम लोगों ने इसका खामियाजा भुगता है। उन्होंने कहा कि जनता अब जवाब चाहती है और राजनीतिक दलों को हिंसा की राजनीति से दूर रहना चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि अतीत में कई चर्चित मामलों में खुद टीएमसी नेताओं ने केंद्रीय एजेंसियों से जांच की मांग की थी, जिससे राज्य पुलिस पर उनके भरोसे को लेकर सवाल उठे थे।

टीएमसी ने सुरक्षा व्यवस्था पर जताई चिंता

दूसरी ओर, टीएमसी नेताओं का कहना है कि उनके नेताओं को निशाना बनाया जा रहा है और सुरक्षा व्यवस्था पर्याप्त नहीं है। पार्टी का आरोप है कि विपक्षी दलों के समर्थक माहौल खराब करने की कोशिश कर रहे हैं।

टीएमसी नेतृत्व ने यह भी कहा कि हाल की घटनाओं ने राजनीतिक कार्यकर्ताओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

अधीर रंजन चौधरी ने भी उठाए सवाल

इस पूरे मामले पर कांग्रेस नेता और पूर्व सांसद अधीर रंजन चौधरी ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि जब किसी जनप्रतिनिधि के दौरे की जानकारी प्रशासन को पहले से होती है, तब उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी होती है।

उन्होंने कहा कि किसी भी सांसद, विधायक या राजनीतिक कार्यकर्ता पर हमला लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हैं, लेकिन हिंसा किसी समस्या का समाधान नहीं हो सकती।

बढ़ा राजनीतिक तनाव

अभिषेक बनर्जी और कल्याण बनर्जी से जुड़ी घटनाओं के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में तनाव और बढ़ गया है। विभिन्न राजनीतिक दल लगातार एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं, जबकि प्रशासन घटनाओं की जांच और कानून-व्यवस्था बनाए रखने की बात कह रहा है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने की संभावना है।