संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत ने एक बार फिर सीमा पार आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्तान को कड़े शब्दों में जवाब दिया है। भारत ने स्पष्ट किया कि वह अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने और आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए पूरी तरह सक्षम और अधिकृत है। साथ ही, भारत ने पाकिस्तान को चेतावनी देते हुए कहा कि उसे आतंकवाद को समर्थन देने की नीति के गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश ने मंगलवार को हुई बहस के दौरान पाकिस्तान के दावों को सिरे से खारिज किया। उन्होंने यह प्रतिक्रिया पाकिस्तान के प्रतिनिधि आसिम इफ्तिखार अहमद के बयान के जवाब में दी, जिसमें उन्होंने भारत पर आरोप लगाए थे।
पी. हरीश ने कहा कि पाकिस्तान लंबे समय से सीमा पार आतंकवाद को बढ़ावा देता रहा है, जिससे उसकी मंशा और बयानबाजी दोनों पर सवाल उठते हैं। उन्होंने कहा कि 1947 से ही पाकिस्तान की ओर से भारत विरोधी गतिविधियों और कट्टरपंथ को बढ़ावा देने की प्रवृत्ति जारी रही है।
कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान के बयान का जवाब देते हुए भारत ने दोहराया कि जम्मू-कश्मीर देश का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है, जिसका कानूनी और स्थायी विलय भारत में हो चुका है। भारत ने यह भी कहा कि पाकिस्तान ने कई बार सीमा पार आतंकवाद को समर्थन देकर और सैन्य कार्रवाइयों के जरिए क्षेत्रीय शांति को प्रभावित किया है।
भारत ने संयुक्त राष्ट्र के 21 अप्रैल 1948 के प्रस्ताव का हवाला देते हुए कहा कि पाकिस्तान को अपने कब्जे वाले क्षेत्रों से सैनिकों की वापसी करनी थी, जिसका पालन आज तक नहीं किया गया है।
भारतीय प्रतिनिधि ने कहा कि पाकिस्तान द्वारा कश्मीर को लेकर लगातार उठाए जा रहे मुद्दे वास्तविकताओं से दूर हैं और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर गलत जानकारी फैलाने का प्रयास मात्र हैं।