नई दिल्ली: इजराइल-ईरान संघर्ष के बीच फारस की खाड़ी और होर्मुज जलमार्ग पर वाणिज्यिक जहाजों पर हो रहे हमलों के मद्देनजर भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय की रणनीति का समर्थन किया है।
अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) की लंदन में हुई 36वीं असाधारण परिषद बैठक में संयुक्त अरब अमीरात (UAE) द्वारा प्रस्तुत ड्राफ्ट घोषणा को भारत समेत 115 से अधिक देशों ने सह-प्रायोजित किया। बैठक में कुल 120 से अधिक देशों ने भाग लिया। प्रस्ताव में ईरान के हमलों की कड़ी निंदा की गई और होर्मुज जलमार्ग को बाधित करने की कोशिशों को अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन करार दिया गया।
आईएमओ की बैठक में लिए गए अहम फैसले
पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष और होर्मुज जलमार्ग पर हमलों के कारण वैश्विक शिपिंग और ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला को खतरा पैदा हो गया है। इस मार्ग से दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल का आवागमन होता है, जबकि भारत की आवश्यकता का 40 प्रतिशत गैस और तेल इसी मार्ग से आता है।
आईएमओ ने प्रस्ताव में कहा कि ईरान को तुरंत नौवहन में किसी भी तरह की बाधा या हमले बंद करने चाहिए। साथ ही जोखिम वाले क्षेत्रों से जहाजों को सुरक्षित निकालने के लिए ‘समुद्री सुरक्षा गलियारा’ बनाने की अपील की गई।
भारत की भागीदारी और बयान
भारत ने इस प्रस्ताव का मजबूत समर्थन किया। भारत के उच्चायुक्त (चीन में नवनियुक्त राजदूत) विक्रम दोराईस्वामी ने बैठक में कहा कि भारत समुद्री सुरक्षा, नौवहन की स्वतंत्रता, सभी नाविकों की सुरक्षा और ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला की रक्षा के प्रति प्रतिबद्ध है।
दोरेस्वामी ने तीन भारतीय नाविकों समेत सात नाविकों की मौत पर शोक व्यक्त करते हुए कहा,
"वाणिज्यिक शिपिंग और नागरिक समुद्री ढांचे पर हमले अस्वीकार्य हैं। इससे निर्दोष लोगों की जानें गई हैं और नाविकों को गंभीर खतरे का सामना करना पड़ रहा है। हम सभी नाविकों की सुरक्षा और कल्याण को लेकर गंभीर रूप से चिंतित हैं।"
उन्होंने जोर देकर कहा कि अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत व्यापारी और वाणिज्यिक जहाजों को सुरक्षित और स्वतंत्र नौवहन का अधिकार होना चाहिए, और होर्मुज जैसे जलमार्गों में बाधा डालना स्वीकार्य नहीं है।
होर्मुज पर तनाव और भारत की चिंता
होर्मुज जलमार्ग बंद होने से भारत की ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक कारोबार प्रभावित होने का खतरा है। इस मार्ग पर कुल 24 भारतीय जहाज फंसे हुए हैं, जिनमें 658 भारतीय नाविक कार्यरत हैं। भारत ने सभी पक्षों से नागरिक सुरक्षा, संयम और कूटनीतिक संवाद के माध्यम से तनाव कम करने की अपील की है।