नई दिल्ली। लोकसभा में महिला आरक्षण संविधान संशोधन विधेयक पारित नहीं होने के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। सरकार ने विपक्ष पर गंभीर आरोप लगाए हैं, जबकि विपक्ष इसे अपनी राजनीतिक सफलता के रूप में देख रहा है। इसी बीच केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने विपक्ष के रुख को महिला सशक्तीकरण के खिलाफ बताते हुए कड़ी प्रतिक्रिया दी है।
जेपी नड्डा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा कि संविधान (131वां संशोधन) विधेयक-2026 का पारित न होना कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, द्रमुक, सपा और इंडिया गठबंधन की सोच को उजागर करता है। उन्होंने कहा कि यह दिन संसदीय इतिहास में एक निराशाजनक अध्याय के रूप में दर्ज होगा।
नड्डा के अनुसार यह केवल एक विधेयक का असफल होना नहीं है, बल्कि उन करोड़ों महिलाओं की उम्मीदों को झटका है जिन्होंने बेहतर भविष्य की आशा की थी। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष ने महिला सशक्तीकरण की बजाय राजनीतिक विरोध को प्राथमिकता दी, जिससे महिलाओं के अधिकारों की राह बाधित हुई।
उन्होंने यह भी कहा कि सरकार महिलाओं को सम्मान और अधिकार दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है और यह अभियान आगे भी जारी रहेगा।
वहीं, तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण क्षण है और उन्होंने सोशल मीडिया पर परिसीमन विधेयक से जुड़ी एक प्रतीकात्मक पोस्ट साझा की।
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी विपक्ष पर तीखा हमला करते हुए कहा कि महिला आरक्षण जैसे ऐतिहासिक अवसर को समर्थन न देना दोहरे रवैये को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि सरकार महिलाओं के अधिकारों के लिए लगातार काम करती रहेगी और जनता इस रुख को याद रखेगी।
तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने इस घटनाक्रम को राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बताते हुए विपक्षी नेताओं के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह घटनाक्रम भारतीय राजनीति में एक अहम मोड़ के रूप में याद किया जाएगा।
वहीं, एनसीपी (शरद पवार गुट) के प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि सरकार ने महिला सशक्तीकरण के नाम पर राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश की, लेकिन संसद में उसे पर्याप्त समर्थन नहीं मिल सका। उन्होंने इसे जनता की जीत बताते हुए कहा कि संसद में अभी भी लोकतांत्रिक आवाजें मजबूत हैं।