भारत में सोमवार को इस्राइल के राजदूत रूवेन अजार ने महत्वपूर्ण बयान दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि न तो इस्राइल और न ही अमेरिका का ईरान पर कोई सैन्य हमला करने का इरादा है, और न ही वे वहां जमीन पर कब्जा करना चाहते हैं। उनके अनुसार असली मकसद ईरान के आंतरिक हालात में सुधार लाना है और यह बदलाव ईरानी जनता के माध्यम से होना चाहिए।
राजदूत अजार ने कहा कि अगर ईरान की जनता चाहती है, तो वह अपने देश के नेतृत्व में बदलाव ला सकती है। इस्राइल और अमेरिका का मानना है कि सैन्य कार्रवाई की बजाय वहां के नागरिकों के जरिए बदलाव ज्यादा प्रभावशाली और स्थायी होगा। इससे न केवल ईरान की जनता को फायदा मिलेगा, बल्कि पूरे क्षेत्र में स्थिरता और सुरक्षा भी बढ़ेगी।
रूवेन अजार ने जोर देकर कहा कि शांत और स्थिर पश्चिम एशिया से सभी देशों को लाभ होगा, चाहे वह इस्राइल और उसके सहयोगी हों या खाड़ी देश और अंतरराष्ट्रीय समुदाय। उनका कहना था कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी चाहता है कि यह क्षेत्र उन खतरों से मुक्त रहे, जो ईरान की मौजूदा नीतियों के कारण पैदा हो रहे हैं।
इस्राइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव
यह बयान ऐसे समय में आया है जब इस्राइल और ईरान के बीच संबंध बेहद तनावपूर्ण हैं। दोनों देश एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगा रहे हैं। इस्राइल का कहना है कि ईरान अपने मिसाइल प्रोग्राम और हथियारबंद समूहों की मदद से क्षेत्र में अशांति फैला रहा है। वहीं, ईरान का दावा है कि उसका सैन्य और परमाणु कार्यक्रम केवल अपनी रक्षा के लिए है और वह अमेरिका तथा इस्राइल की नीतियों को आक्रामक मानता है।
पिछले कुछ वर्षों में दोनों देशों के बीच तनाव साइबर हमलों और गुप्त ऑपरेशनों के रूप में भी सामने आया है। इसके कारण दुनिया के व्यापारिक मार्ग और ऊर्जा आपूर्ति पर नकारात्मक असर पड़ रहा है। हालांकि, राजदूत अजार के बयान से संकेत मिलता है कि फिलहाल इस्राइल युद्ध के बजाय ईरान में नागरिकों के माध्यम से राजनीतिक बदलाव की उम्मीद कर रहा है।