कर्नाटक की राजनीति में उस समय हलचल बढ़ गई जब मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री रामलिंगा रेड्डी का इस्तीफा स्वीकार करने से साफ इनकार कर दिया। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि इस पूरे मामले को पार्टी और सरकार के भीतर बातचीत के जरिए सुलझाया जाएगा।

रामलिंगा रेड्डी द्वारा इस्तीफे की घोषणा के बाद पैदा हुए राजनीतिक हालात को शांत करने के लिए कांग्रेस नेतृत्व लगातार प्रयास कर रहा है। इसी बीच मुख्यमंत्री शिवकुमार का बयान सामने आया, जिसमें उन्होंने कहा कि इस्तीफा स्वीकार करने का कोई सवाल ही नहीं उठता।

“इस्तीफे पर बात करूंगा” – डीके शिवकुमार

मुख्यमंत्री ने कहा, “रामलिंगा रेड्डी ने संभवतः मुझे अपना इस्तीफा व्हाट्सएप पर भेजा है। मैं उस समय व्यस्त था, लेकिन मैं उनसे जरूर बात करूंगा। किसी भी परिस्थिति में उनका इस्तीफा स्वीकार नहीं किया जाएगा।”

उन्होंने आगे कहा कि यह पूरा मुद्दा पार्टी के भीतर ही सुलझाया जाएगा और इसे सार्वजनिक विवाद का रूप नहीं लेने दिया जाएगा। मुख्यमंत्री ने भरोसा जताया कि सभी संबंधित पक्षों से चर्चा कर समाधान निकाला जाएगा।

विभाग को लेकर नाराजगी बनी वजह

रामलिंगा रेड्डी ने शुक्रवार को इस्तीफे का ऐलान किया था। बताया जा रहा है कि उन्हें प्रमुख एवं मध्यम सिंचाई विभाग दिए जाने से असंतोष था, जबकि पहले उन्हें बेंगलुरु विकास विभाग दिए जाने का आश्वासन मिला था।

यह मामला नई सरकार के सामने पहली बड़ी राजनीतिक चुनौती के रूप में देखा जा रहा है, जिसके चलते कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं को भी हस्तक्षेप करना पड़ा है।

इस्तीफा वापस लेने की अपील जारी

सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और रणदीप सिंह सुरजेवाला लगातार रामलिंगा रेड्डी से संपर्क में हैं और उन्हें इस्तीफा वापस लेने के लिए मनाने की कोशिश कर रहे हैं।

रामलिंगा रेड्डी ने कहा है कि उन्होंने किसी विशेष विभाग की मांग नहीं की थी, लेकिन दिए गए आश्वासन पूरे न होने से वे निराश हैं। उन्होंने यह भी बताया कि पार्टी नेतृत्व के साथ बातचीत जारी है और समाधान निकालने के प्रयास किए जा रहे हैं।