पश्चिम बंगाल की सियासत में शनिवार को उस समय नई हलचल पैदा हो गई जब तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के राज्य सचिव मोहम्मद अजमल सिद्दीकी ने पार्टी के सभी पदों और प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देने की घोषणा कर दी। उन्होंने अपना इस्तीफा पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी को भेजते हुए संगठन के मौजूदा माहौल और कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए।
अपने पत्र में सिद्दीकी ने कहा कि यह फैसला उन्होंने काफी विचार-विमर्श के बाद लिया है। उन्होंने लिखा कि पार्टी के साथ उनका लंबा जुड़ाव रहा है और उन्होंने हमेशा संगठन की मजबूती तथा कार्यकर्ताओं के हितों के लिए काम किया। हालांकि अब वह पार्टी के साथ अपनी राजनीतिक यात्रा जारी रखने की स्थिति में नहीं हैं।
सिद्दीकी ने पत्र में दावा किया कि बीते कुछ वर्षों में कई समर्पित और मेहनती कार्यकर्ताओं को संगठन में अपेक्षित सम्मान और महत्व नहीं मिल पाया। उनके अनुसार जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं की आवाज को पर्याप्त प्राथमिकता नहीं दी जा रही, जिससे पार्टी के भीतर असंतोष बढ़ रहा है।
उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी में पहले मौजूद संवाद और सामूहिक निर्णय लेने की संस्कृति कमजोर होती दिखाई दे रही है। इससे कई पुराने और सक्रिय कार्यकर्ताओं में निराशा का माहौल बना है।
अपने इस्तीफे में सिद्दीकी ने अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व और कार्यशैली को लेकर भी असहमति जताई। उनका कहना था कि मौजूदा व्यवस्था में लंबे समय से जुड़े कार्यकर्ताओं को पर्याप्त भागीदारी और महत्व नहीं मिल रहा, जिससे जिम्मेदारियों का प्रभावी ढंग से निर्वहन करना कठिन होता जा रहा है।
उन्होंने राज्य सचिव (अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ) के रूप में मिली जिम्मेदारियों के लिए पार्टी नेतृत्व का आभार व्यक्त करते हुए अपने इस्तीफे को तत्काल प्रभाव से स्वीकार करने का अनुरोध किया। साथ ही उन्होंने ममता बनर्जी और पार्टी के भविष्य के लिए शुभकामनाएं भी दीं।
सिद्दीकी के इस्तीफे को ऐसे समय में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जब पश्चिम बंगाल में राजनीतिक गतिविधियां तेज हैं और विभिन्न दल आगामी चुनावी रणनीतियों को लेकर सक्रिय हैं।