नई दिल्ली/कोलकाता। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के चुनावी और राजनीतिक प्रबंधन के लिए काम करने वाली संस्था इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी (I-PAC) और इसके निदेशक प्रतीक जैन के घर गुरुवार को ईडी ने छापेमारी की। इस दौरान बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी मौके पर पहुंचीं और कथित तौर पर एक फाइल और लैपटॉप अपने साथ ले गईं।

टीएमसी ने आरोप लगाया कि केंद्रीय एजेंसियां चुनाव से पहले पार्टी की रणनीतिक जानकारी और डेटा हासिल करने की कोशिश कर रही हैं। वहीं ईडी ने ममता पर जांच में बाधा डालने और दस्तावेज़ों को जबरन अपने कब्जे में लेने का आरोप लगाया। यह मामला हाई कोर्ट तक पहुंच गया है।

हाई कोर्ट में सुनवाई में अव्यवस्था
शुक्रवार दोपहर करीब 2:30 बजे जस्टिस शुभ्रा घोष की बेंच में सुनवाई शुरू होने वाली थी, लेकिन वकीलों और इंटरर्न की भारी भीड़ के कारण हालात तनावपूर्ण हो गए। जस्टिस घोष ने गैर-जुड़े वकीलों और स्टाफ को बाहर जाने को कहा और पांच मिनट का समय दिया। भीड़ कम न होने पर सुनवाई स्थगित कर दी गई।

टीएमसी सांसद और वकील कल्याण बनर्जी ने भी लोगों से बाहर जाने की अपील की, लेकिन वकीलों के बीच धक्का-मुक्की और बहस शुरू हो गई। इससे नाराज होकर जस्टिस घोष ने सुनवाई स्थगित कर दी।

ईडी का आरोप
केंद्रीय एजेंसी ने हाई कोर्ट में दावा किया कि ममता बनर्जी ने छापेमारी के दौरान मौके पर पहुंचकर जांच में बाधा डाली। उनके साथ पुलिस बल था और उन्होंने कई महत्वपूर्ण फाइलें, दस्तावेज और लैपटॉप जबरन ले लिए।

टीएमसी की याचिका
दूसरी ओर, टीएमसी ने केंद्र सरकार के खिलाफ हाई कोर्ट में याचिका दायर की है। पार्टी का कहना है कि चुनाव से पहले यह कार्रवाई उनकी रणनीतिक तैयारियों को रोकने और जानबूझकर डेटा हासिल करने के लिए की गई। ममता ने इसे राजनीतिक प्रतिशोध करार दिया।

केंद्र व ईडी के वकील का मोबाइल हैक होने का दावा
सुनवाई से पहले एक और घटनाक्रम हुआ। ईडी और केंद्र के वकील धीराज त्रिवेदी ने बताया कि दोपहर लगभग 1:30 बजे उनका मोबाइल हैक कर लिया गया। उन्होंने अदालत को बताया कि इस मामले में वे दिल्ली स्थित ईडी मुख्यालय और केंद्र सरकार से संपर्क में हैं।

ममता बनर्जी का विरोध मार्च
ईडी की कार्रवाई के विरोध में दिल्ली और कोलकाता समेत कई जगह प्रदर्शन हुए। ममता बनर्जी कोलकाता में उस स्थल पर पहुंचीं, जहां से उन्होंने I-PAC रेड के खिलाफ मार्च की अगुवाई की। वहीं, दिल्ली में तृणमूल सांसदों ने केंद्रीय गृह मंत्रालय के बाहर विरोध प्रदर्शन किया, जिनमें से आठ सांसदों को हिरासत में ले लिया गया।