नई दिल्ली। एशिया के सबसे अमीर कारोबारी मुकेश अंबानी के नेतृत्व वाली रिलायंस जियो प्लेटफॉर्म्स के संभावित इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) की चर्चा अब जोर पकड़ रही है। मीडिया रिपोर्ट्स और सूत्रों के अनुसार, कंपनी इस साल अपना IPO लाने पर विचार कर रही है, जो भारत के कॉरपोरेट इतिहास में सबसे बड़ा हो सकता है।

सूत्रों के मुताबिक, रिलायंस जियो अपनी कुल हिस्सेदारी का केवल 2.5% बेचने की योजना बना रही है। यदि यह IPO बाजार में आता है, तो कंपनी लगभग 4 अरब डॉलर (करीब 33,000 करोड़ रुपये) जुटा सकती है। यह पिछले साल हुंडई मोटर इंडिया के 3.3 अरब डॉलर के IPO से भी अधिक होगा, जो अब तक का सबसे बड़ा था।

नवंबर में इनवेस्टमेंट बैंक जेफरीज ने जियो का वैल्यूएशन 180 अरब डॉलर (करीब 15 लाख करोड़ रुपये) आंका था। इस आधार पर 2.5% हिस्सेदारी बेचकर कंपनी 4.5 अरब डॉलर तक जुटा सकती है। वहीं, कुछ बैंकर्स 200 अरब डॉलर से 240 अरब डॉलर तक के वैल्यूएशन का सुझाव दे रहे हैं।

हालांकि, कंपनी ने अभी तक किसी अंतिम आंकड़े पर निर्णय नहीं लिया है। IPO से पहले रिलायंस वित्त मंत्रालय की मंजूरी का इंतजार कर रही है। बताया जा रहा है कि बाजार नियामक SEBI ने बड़ी कंपनियों के IPO में न्यूनतम हिस्सेदारी बिक्री की सीमा 5% से घटाकर 2.5% करने का प्रस्ताव रखा है, जो अभी विचाराधीन है।

IPO की तैयारियों में मॉर्गन स्टेनली और कोटक बैंकर्स शामिल हैं, जो रिलायंस के साथ कागजी कार्रवाई और योजना बनाने में जुटे हैं। उम्मीद है कि विदेशी निवेशक जैसे केकेआर, जनरल अटलांटिक और सिल्वर लेक, जिन्होंने पहले जियो में निवेश किया था, इस IPO के जरिए अपनी हिस्सेदारी बेच सकते हैं।

मुकेश अंबानी ने पिछले अगस्त में कहा था कि जियो को 2026 की पहली छमाही में लिस्ट किया जाएगा। हालांकि, सूत्रों के अनुसार लिस्टिंग की सही तारीख बाजार की स्थितियों पर निर्भर करेगी। 2019 में भी पांच साल के भीतर जियो को लिस्ट करने की योजना बनी थी, लेकिन डिजिटल और एआई व्यवसायों में विस्तार के चलते इसे टाल दिया गया।

जियो भारत का सबसे बड़ा टेलीकॉम नेटवर्क है, जिसके 50 करोड़ से अधिक यूजर्स हैं। कंपनी ने एआई इन्फ्रास्ट्रक्चर विकसित करने के लिए एनवीडिया के साथ साझेदारी भी की है। रिलायंस ने अभी तक IPO के बारे में विस्तृत जानकारी साझा नहीं की है।