लंदन। ब्रिटेन की विपक्षी कंजर्वेटिव पार्टी की नेता और छाया विदेश सचिव प्रीति पटेल ने बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों पर हो रही हिंसा को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने ब्रिटिश विदेश सचिव को लिखे अपने पत्र में हालात को "अत्यंत गंभीर" बताया और कहा कि धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए। पत्र में उन्होंने स्पष्ट किया कि हिंदू समुदाय के खिलाफ की जा रही हत्याएं और उत्पीड़न गलत हैं और तुरंत बंद होना चाहिए।
प्रीति पटेल ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट पर भी यह पत्र साझा करते हुए लिखा कि ब्रिटेन सरकार को अपने कूटनीतिक और समन्वयात्मक प्रयासों का इस्तेमाल कर बांग्लादेश में शांति और सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए, ताकि धार्मिक स्वतंत्रता कायम रहे और हिंदू समुदाय सुरक्षित रह सके।
18 दिनों में छह मौतें, हिंसा बढ़ी
पत्र में उन्होंने हाल की रिपोर्टों का हवाला देते हुए कहा कि सिर्फ 18 दिनों में कम से कम छह हिंदुओं की हत्या की घटनाएँ सामने आई हैं। उन्होंने इसे "अस्वीकार्य" बताया और ब्रिटेन सरकार से कई सवाल उठाए, जिनमें शामिल हैं:
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पिछले साल में स्थिति की निगरानी और बांग्लादेश अधिकारियों के साथ की गई बातचीत के कदम।
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हाल के हफ्तों में ब्रिटिश विदेश सचिव और अन्य मंत्रियों द्वारा बढ़ती हिंसा पर किए गए सीधे संपर्क।
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हिंदू समुदायों की सुरक्षा के लिए प्राप्त आश्वासन।
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ब्रिटेन में बांग्लादेश के उच्चायुक्त से इस मुद्दे पर हुई बातचीत।
उन्होंने दिसंबर 2024 में हाउस ऑफ कॉमन्स में किए गए एक तत्काल प्रश्न का भी जिक्र किया, जिसमें तत्कालीन इंडो-पैसिफिक मंत्री ने बांग्लादेश दौरे के दौरान अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर आश्वासन दिया था।
अंतरिम सरकार में हिंसा का उभार
अगस्त 2024 से मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के कार्यकाल में अल्पसंख्यकों, खासकर हिंदुओं के खिलाफ हिंसा में वृद्धि दर्ज की गई। ह्यूमन राइट्स कांग्रेस फॉर बांग्लादेश माइनॉरिटीज (HRCBM) के अनुसार, 6 जून 2025 से 5 जनवरी 2026 के बीच 116 मौतों की पुष्टि हुई, जिसमें लिंचिंग, हत्या और संदिग्ध मौतें शामिल हैं।
संगठन ने इसे "छिटपुट घटनाएँ" नहीं बल्कि पूरे देश में अल्पसंख्यकों को निशाना बनाकर किए गए व्यवस्थित अत्याचारों का पैटर्न बताया है। यह हिंसा बांग्लादेश के सभी आठ डिवीजनों और 45 जिलों में फैली हुई है।
दिसंबर 2025 में दर्जनों हमले हुए, जिनमें मंदिरों पर हमला, आगजनी और लिंचिंग शामिल हैं। भारत के विदेश मंत्रालय ने भी हाल ही में "अल्पसंख्यकों पर हमलों के लगातार पैटर्न" की निंदा करते हुए इसे गंभीर चिंता का विषय बताया है।