भाजपा सांसद निशिकांत दुबे की ओर से बीजू पटनायक को लेकर दिए गए बयान पर सियासी विवाद तेज हो गया है। इस मुद्दे पर ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री और बीजद प्रमुख नवीन पटनायक ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए बयान की तीखी आलोचना की है। उन्होंने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि टिप्पणी करने वाले सांसद को इतिहास की पूरी जानकारी नहीं है।
भुवनेश्वर में मीडिया से बातचीत के दौरान नवीन पटनायक ने कहा कि बीजू पटनायक के बारे में की गई आपत्तिजनक टिप्पणियां बेहद दुर्भाग्यपूर्ण हैं। उन्होंने बताया कि चीन के साथ संघर्ष के समय तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने बीजू पटनायक को रणनीतिक सहयोग के लिए दिल्ली में अपने कार्यालय के पास एक अलग दफ्तर उपलब्ध कराया था, जबकि वे उस समय ओडिशा के मुख्यमंत्री थे।
नवीन पटनायक ने अपने निजी अनुभव का जिक्र करते हुए कहा कि उस दौर में वे लगभग 13 वर्ष के थे और उन्हें अच्छी तरह याद है कि चीन के हमले को लेकर बीजू पटनायक कितने आक्रोशित थे और उन्होंने देश की सुरक्षा के लिए कितनी सक्रिय भूमिका निभाई थी। उन्होंने भाजपा सांसद के बयान को गैर-जिम्मेदाराना करार देते हुए उस पर नाराजगी जताई।
दरअसल, 27 मार्च को निशिकांत दुबे ने दावा किया था कि 1960 के दशक में अमेरिका ने तिब्बत में अपनी मौजूदगी बढ़ाई थी और उस समय दलाई लामा तथा उनके भाई अमेरिकी प्रशासन के संपर्क में थे। उन्होंने यह भी कहा कि भारत-चीन संघर्ष के दौरान अमेरिका और सीआईए की भूमिका रही, और बीजू पटनायक उस समय इन पक्षों के बीच एक कड़ी थे।
इस बयान के विरोध में बीजद के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद सस्मित पात्रा ने संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी से जुड़ी संसदीय स्थायी समिति से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने राज्यसभा के सभापति को लिखे पत्र में कहा कि वे सिद्धांतों के आधार पर यह कदम उठा रहे हैं और ऐसे व्यक्ति के नेतृत्व में काम जारी नहीं रख सकते, जिसने बीजू पटनायक के प्रति अपमानजनक टिप्पणी की हो।
इधर, ओडिशा में एक अन्य मुद्दे को लेकर भी राजनीतिक माहौल गरमाया हुआ है। कालाहांडी जिले के नरला में बीजद विधायक मनोरमा मोहंती के आवास पर पुलिस कार्रवाई को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। उनके पति पर एक तहसीलदार को धमकाने का आरोप है, जिसके चलते पुलिस वहां पहुंची थी। विधायक ने आरोप लगाया कि इस दौरान उनकी बेटी और घरेलू सहायिका के साथ दुर्व्यवहार किया गया।
इस घटना पर भी नवीन पटनायक ने नाराजगी जताते हुए इसे चिंताजनक बताया। उन्होंने कहा कि एक महिला विधायक के घर इस तरह की कार्रवाई और कथित दुर्व्यवहार लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। उनके अनुसार, इस तरह की घटनाएं लोकतंत्र की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं।