पटना। नीट छात्रा की संदिग्ध मौत के मामले में शंभू गर्ल्स हॉस्टल के बिल्डिंग मालिक मनीष रंजन की जमानत याचिका पर बुधवार को कोर्ट में सुनवाई हुई। अदालत ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रखते हुए अगली तारीख, गुरुवार को निर्णय सुनाने का ऐलान किया।
सुनवाई में जांच एजेंसियों की भूमिका पर सवाल
पॉक्सो कोर्ट में करीब ढाई घंटे चली सुनवाई के दौरान जांच एजेंसियों, यानी CBI और पटना पुलिस की SIT की कार्रवाई पर अदालत ने कड़ी नाराजगी जताई। कोर्ट ने सवाल उठाया कि मामले की जांच में दो सप्ताह से ज्यादा समय बीत जाने के बावजूद एजेंसियां निष्क्रिय क्यों रही।
अदालत ने CBI से पूछा कि यदि किसी की गैरकानूनी हिरासत के कारण नुकसान हुआ, तो उसका मुआवजा कौन देगा। कोर्ट ने स्पष्ट जवाब की मांग की।
मनीष रंजन से पूछताछ
सुनवाई के दौरान अदालत ने मनीष रंजन से पूछा कि उन्हें घटना की जानकारी किस स्रोत से मिली। मनीष ने बताया कि 5 जनवरी को वह अपनी बेटी के साथ पावापुरी मेडिकल कॉलेज गए थे और रात को लौट आए। 6 जनवरी की सुबह वह ऑफिस गए और 7 जनवरी को हॉस्टल संचालिका नीलम अग्रवाल से घटना के बारे में पता चला।
SIT और CBI बयानों में अंतर
कोर्ट ने नोट किया कि छात्रा की मौत को दो महीने से अधिक समय हो गया है, लेकिन मौत का स्पष्ट कारण अभी तक सामने नहीं आया। पहले की जांच टीम SIT और CBI के बयानों में विरोधाभास भी अदालत के सामने आया।
पटना पुलिस से भी पूछा गया कि मनीष रंजन की हिरासत में पूछताछ में कौन-कौन से तथ्य सामने आए।
जमानत पर एजेंसियों की स्थिति
कोर्ट ने CBI और SIT से पूछा कि क्या उन्हें मनीष रंजन को जमानत देने में कोई आपत्ति है। दोनों एजेंसियों ने कहा कि फिलहाल जांच के लिए मनीष की मौजूदगी आवश्यक नहीं है, इसलिए जमानत मिलने से जांच प्रभावित नहीं होगी।
साक्ष्यों को लेकर उठे सवाल
छात्रा के कमरे से बरामद दवाइयों की स्ट्रिप के मामले में भी कोर्ट ने सवाल किया। जब छह स्ट्रिप मिलने की बात कही गई थी, तो एविडेंस में केवल तीन ही क्यों दिखाई गईं। SIT ने बताया कि 6 जनवरी को दवाइयां बरामद की गईं और बाद में जब्त की गईं। अदालत ने इस पर और स्पष्टता मांगी।
जमानत का विरोध
सुनवाई के दौरान विशेष पीपी सुरेश चंद्र प्रसाद ने कहा कि मनीष रंजन मामले का मास्टरमाइंड है और उसकी हिरासत में होने से कई अहम तथ्य सामने आ सकते हैं। पीड़ित परिवार के वकील ने भी जमानत का विरोध करते हुए अदालत के सामने कई कानूनी पहलुओं का हवाला दिया।
सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने जमानत पर फैसला सुरक्षित रखते हुए गुरुवार को सुनाने का निर्णय लिया।