लखनऊ। प्रदेश में बिजली उपभोक्ताओं से वसूले जा रहे ईंधन अधिभार (Fuel Surcharge) को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। नियामक आयोग ने जून माह में 10 प्रतिशत ईंधन अधिभार की वसूली के लिए अपनाए गए फार्मूले को गलत करार देते हुए पावर कॉरपोरेशन को सख्त निर्देश जारी किए हैं कि भविष्य में इस पद्धति से कोई भी गलत वसूली न की जाए।

यह मामला तब सामने आया जब राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने नियामक आयोग में याचिका दाखिल कर आरोप लगाया कि जून महीने में उपभोक्ताओं से गलत तरीके से ईंधन अधिभार वसूला गया है। आयोग ने मामले की गंभीरता को देखते हुए पावर कॉरपोरेशन से गणना से जुड़े सभी दस्तावेज तलब किए थे।

पावर कॉरपोरेशन के प्रबंध निदेशक की ओर से 19 जून को जवाब दाखिल कर बताया गया कि अप्रैल 2025 से पूरे प्रदेश में विद्युत क्रय समायोजन अधिभार (FPPCA) की गणना एक तय फार्मूले के आधार पर की जा रही है, जिसके तहत जून 2026 का अधिभार भी निर्धारित किया गया था।

मंगलवार को आयोग की द्विसदस्यीय पीठ ने इस मामले में फैसला सुनाते हुए कहा कि पावर कॉरपोरेशन द्वारा की जा रही एफपीपीसीए गणना प्रक्रिया पूरी तरह त्रुटिपूर्ण है। आयोग ने स्पष्ट किया कि मासिक गणना केवल उसी माह की वास्तविक बिजली खरीद लागत और ट्रांसमिशन शुल्क के आधार पर होनी चाहिए, किसी अन्य माह के समायोजन या देनदारी को इसमें शामिल नहीं किया जा सकता।

आयोग ने पावर कॉरपोरेशन को भविष्य में नियमों के अनुसार ही गणना करने और किसी भी प्रकार की अनियमितता से बचने की सख्त चेतावनी दी है। हालांकि, इस बात पर अभी स्पष्टता नहीं है कि पिछले 14 महीनों में हुई कथित अतिरिक्त वसूली की भरपाई उपभोक्ताओं को कैसे की जाएगी।

इस फैसले के बाद उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि उपभोक्ताओं को पूरा लाभ दिलाने के लिए अब 14 महीनों की गणना की दोबारा समीक्षा जरूरी है। उन्होंने कहा कि जल्द ही आयोग के अध्यक्ष से मुलाकात कर पूरी प्रक्रिया की पुनः जांच की मांग की जाएगी।

परिषद का कहना है कि यदि आयोग ने यह स्वीकार किया है कि गणना प्रक्रिया में गलती हुई है, तो सिर्फ जून ही नहीं बल्कि पिछले 14 महीनों के बिलों का भी पुनर्मूल्यांकन किया जाना चाहिए और उपभोक्ताओं को राहत दी जानी चाहिए।

साथ ही उपभोक्ता परिषद ने यह भी संकेत दिया है कि वह इस मुद्दे पर दोबारा याचिका दाखिल करेगा और गलत वसूली को उपभोक्ताओं के आगामी बिलों में समायोजित कराने की मांग करेगा।

परिषद ने सरकार से भी हस्तक्षेप की अपील की है और कहा है कि इस पूरे मामले में जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की जांच होनी चाहिए। उनका कहना है कि यदि संबंधित अधिकारियों को एफपीपीसीए की सही प्रक्रिया की जानकारी नहीं थी, तो इसका खामियाजा जनता को क्यों भुगतना पड़ा, इसकी जवाबदेही तय की जानी चाहिए।