दिल्ली। रक्षा मंत्री ने सोमवार को देश में अगली पीढ़ी के एयरो इंजन विकास की रफ्तार तेज करने पर जोर देते हुए कहा कि भारत के पास समय बेहद सीमित है। उन्होंने वैज्ञानिकों और तकनीकी विशेषज्ञों से स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि सामान्य परिस्थितियों में किसी इंजन को विकसित करने में 25 वर्ष लगते हैं, तो भारत को यह मानकर चलना चाहिए कि 20 वर्ष पहले ही बीत चुके हैं और अब केवल पांच वर्ष शेष हैं। उनका कहना था कि मौजूदा रणनीतिक जरूरतें और राष्ट्रीय महत्वाकांक्षाएं तेज फैसले और त्वरित परिणाम की मांग करती हैं।

पांच साल में बड़ा लक्ष्य हासिल करने की चुनौती

रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत को कम समय में वह उपलब्धि हासिल करनी होगी, जिसके लिए अन्य देश दो दशक तक काम करते हैं। इसे असंभव नहीं, बल्कि एक राष्ट्रीय चुनौती के रूप में लेना चाहिए। उन्होंने जोर दिया कि वैज्ञानिक समुदाय को अपनी पूरी क्षमता के साथ इस दिशा में जुटना होगा।

साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि देश को केवल पांचवीं पीढ़ी के इंजन तक सीमित नहीं रहना चाहिए। छठी पीढ़ी की उन्नत तकनीकों पर भी तत्काल अनुसंधान शुरू करना जरूरी है। बदलती वैश्विक तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग और नए मटेरियल के बढ़ते उपयोग का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि भारत को इन क्षेत्रों में अग्रणी भूमिका निभानी होगी।

अंतरराष्ट्रीय सहयोग से मिलेगा लाभ

उन्होंने बताया कि ब्रिटेन के साथ संयुक्त अध्ययन के तहत एयरो इंजन विकास पर काम चल रहा है। इसके अलावा फ्रांस के साथ भी नेशनल एयरो इंजन मिशन के अंतर्गत प्रक्रिया शुरू की जा चुकी है। उनका कहना था कि फ्रांस और ब्रिटेन जैसे देशों के पास इस क्षेत्र में लंबा अनुभव है और उनके साथ सहयोग से भारत को नई तकनीकों के साथ-साथ पूर्व चुनौतियों को समझने का अवसर मिलेगा।

आत्मनिर्भरता पर जोर

रक्षा मंत्री ने कहा कि सरकार बनने के बाद से रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को प्राथमिकता दी गई है। उन्होंने अपने कार्यकाल का उल्लेख करते हुए कहा कि एयरो इंजन विकास को शीर्ष प्राथमिकता दी गई और इस दिशा में ठोस कदम उठाए गए।

उन्होंने हालिया अभियानों का उदाहरण देते हुए कहा कि स्वदेशी तकनीक और देश में निर्मित हथियारों ने सशस्त्र बलों को प्रभावी समर्थन दिया है। संचार प्रणाली, निगरानी उपकरण और आक्रामक क्षमता—हर क्षेत्र में घरेलू तकनीक की भूमिका स्पष्ट रही। इससे न केवल सेना का मनोबल बढ़ा, बल्कि देशवासियों में भी आत्मविश्वास मजबूत हुआ।

बदलते समय में नए अवसर

रक्षा मंत्री ने कहा कि वैश्विक परिस्थितियों के बीच भारत के सामने कई नए अवसर उभर रहे हैं। उन्होंने भारत और यूरोपीय संघ के बीच लंबे समय से लंबित मुक्त व्यापार समझौते के पूरा होने का उल्लेख करते हुए इसे देश की बढ़ती आर्थिक और राजनीतिक ताकत की स्वीकृति बताया।

उन्होंने हाल में ग्रीस के रक्षा मंत्री से मुलाकात का जिक्र करते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत को अब उभरती शक्ति नहीं, बल्कि संभावित सुपर पावर और वैश्विक नेतृत्वकर्ता के रूप में देखा जा रहा है। उनके अनुसार, यह विश्वास देश की बढ़ती सामरिक क्षमता और तकनीकी प्रगति का परिणाम है।