पश्चिम बंगाल में बुधवार (29 अप्रैल) को दूसरे चरण का मतदान संपन्न होने के साथ ही राज्य में कुल मतदान प्रतिशत 92.52 तक पहुंच गया है। दोनों चरणों के आंकड़ों को मिलाकर देखा जाए तो यह अब तक का सबसे अधिक मतदान है। इससे पहले राज्य में कभी भी 90 प्रतिशत से अधिक वोटिंग दर्ज नहीं की गई थी। इस बार का मतदान न सिर्फ बंगाल बल्कि देश के अन्य राज्यों के रिकॉर्ड को भी पीछे छोड़ता नजर आ रहा है। अब तक यह रिकॉर्ड त्रिपुरा (2013) के नाम था, जहां 91.82 प्रतिशत मतदान हुआ था।
दोनों चरणों में रिकॉर्ड मतदान
इस बार पश्चिम बंगाल में चुनाव दो चरणों में कराए गए। पहले चरण में 93.19 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया, जबकि दूसरे चरण में भी वोटिंग 90 प्रतिशत से अधिक रही। दोनों चरणों के औसत को देखें तो यह आंकड़ा 90 प्रतिशत से ऊपर पहुंच गया है, जो राज्य के पिछले सभी चुनावों से अधिक है।
पहले के चुनावों का रिकॉर्ड
अगर पुराने चुनावों पर नजर डालें तो 2011 में पश्चिम बंगाल में 84.33 प्रतिशत मतदान हुआ था, जो उस समय का सबसे अधिक आंकड़ा था। यही वह चुनाव था जब राज्य में 34 साल से सत्ता में रही वामपंथी सरकार का अंत हुआ और तृणमूल कांग्रेस ने पहली बार सरकार बनाई थी। इसके बाद भी 1996 और 2006 में मतदान प्रतिशत 80 के आसपास रहा, लेकिन मौजूदा स्तर तक नहीं पहुंच सका।
2021 और 2026 के बीच बड़ा अंतर
2021 के विधानसभा चुनाव में पश्चिम बंगाल में 8 चरणों में मतदान हुआ था, जबकि 2026 में यह प्रक्रिया सिर्फ 2 चरणों में पूरी कर ली गई। तुलना करने पर साफ होता है कि इस बार मतदान प्रतिशत काफी बढ़ा है।
- 2026 पहला चरण: 93.19%
- 2026 दूसरा चरण: लगभग 90%
- 2021 पहला चरण (समान सीटें): 83.18%
- 2021 दूसरा चरण (समान सीटें): 81.08%
- 2021 कुल मतदान: 82.17%
इस तरह 2026 में मतदान प्रतिशत में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
मतदाता संख्या में भी बढ़ोतरी
2021 में राज्य में लगभग 7.34 करोड़ मतदाता पंजीकृत थे, जिनमें से 6.03 करोड़ लोगों ने मतदान किया था। वहीं 2026 में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बाद मतदाताओं की संख्या 6.82 करोड़ हो गई, जिनमें से अब तक 6.25 करोड़ से अधिक वोट डाले जा चुके हैं।
कुल मिलाकर, इस बार का चुनाव न सिर्फ मतदान प्रतिशत के लिहाज से रिकॉर्ड तोड़ रहा है, बल्कि मतदाता भागीदारी के मामले में भी नया इतिहास बनाता दिख रहा है।