नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में जारी युद्ध को लेकर भारत में भी चिंता बढ़ने लगी है। कांग्रेस नेता शशि थरूर ने कहा है कि इस संघर्ष का प्रभाव केवल सैन्य मोर्चे तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका असर भारत की अर्थव्यवस्था और आम नागरिकों की जिंदगी पर भी पड़ सकता है।
रसोई गैस की आपूर्ति पर पड़ सकता है असर
थरूर के मुताबिक भारत अपनी जरूरत की बड़ी मात्रा में लिक्विड पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) विदेशों से मंगाता है। उन्होंने बताया कि देश की कुल एलपीजी जरूरत का लगभग 60 प्रतिशत आयात किया जाता है, जिसमें से करीब 90 प्रतिशत आपूर्ति कतर और अन्य खाड़ी देशों से होती है।
उन्होंने आशंका जताई कि यदि क्षेत्र में तनाव बढ़ता है तो रसोई गैस की सप्लाई प्रभावित हो सकती है। इसका असर घरेलू गैस सिलेंडर के साथ-साथ होटल, रेस्टोरेंट और ढाबों के संचालन पर भी पड़ सकता है।
तेल की कीमतें बढ़ने का खतरा
थरूर ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों को फिलहाल नियंत्रित रखने के लिए सरकार की सराहना की, लेकिन साथ ही चेतावनी भी दी कि यह स्थिति ज्यादा समय तक स्थिर नहीं रह सकती।
उनका कहना है कि अगर युद्ध लंबा खिंचता है तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं। इससे परिवहन और लॉजिस्टिक्स की लागत बढ़ेगी, जिसका असर रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों पर पड़ेगा और महंगाई बढ़ सकती है।
शांति प्रयासों को लेकर जताई चिंता
थरूर ने कहा कि कुछ रिपोर्टों में अमेरिकी उपराष्ट्रपति के जरिए शांति वार्ता की संभावना जताई जा रही है, लेकिन जमीनी हालात अभी भी तनावपूर्ण दिखाई दे रहे हैं। उनके अनुसार, क्षेत्र के कुछ देशों के रुख से तत्काल शांति की संभावना स्पष्ट नहीं दिखती।
भारत की भूमिका पर उठाए सवाल
कांग्रेस नेता ने यह भी कहा कि भारत हमेशा से शांति का समर्थक रहा है, लेकिन मौजूदा संकट में शांति बहाली के प्रयासों में उसकी सक्रिय भूमिका ज्यादा नजर नहीं आ रही।
थरूर के मुताबिक, चूंकि इस क्षेत्र की अस्थिरता का सीधा असर भारत की ऊर्जा जरूरतों और अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है, इसलिए देश को वैश्विक स्तर पर अधिक सक्रिय कूटनीतिक पहल करनी चाहिए।