नई दिल्ली। थल सेनाध्यक्ष जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने कहा है कि भारत-चीन सीमा पर मौजूदा स्थिति फिलहाल स्थिर है, लेकिन यह पूरी तरह सामान्य नहीं कही जा सकती। उन्होंने इसे संवेदनशील बताते हुए लगातार सतर्कता बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया है।

सेना प्रमुख के अनुसार, दोनों देशों की सेनाओं के बीच जमीनी स्तर पर हर साल 1,100 से अधिक बार संवाद होता है, जिससे सीमा से जुड़े मुद्दों को सुलझाने और किसी भी गलतफहमी को रोकने में मदद मिलती है।

समझौतों से बढ़ी स्थिरता

जनरल द्विवेदी ने कहा कि डिसएंगेजमेंट यानी सैनिकों की वापसी से जुड़े समझौतों के बाद सीमा पर स्थिति में उल्लेखनीय सुधार और स्थिरता आई है। उन्होंने बताया कि दोनों पक्ष अब एक-दूसरे की चिंताओं को पहले की तुलना में अधिक गंभीरता से ले रहे हैं।

द्विपक्षीय संबंधों में दिखे सकारात्मक संकेत

सेना प्रमुख ने वर्ष 2024-25 के दौरान भारत-चीन संबंधों में कुछ सकारात्मक बदलावों का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार, सैन्य और कूटनीतिक स्तर पर संवाद में बढ़ोतरी हुई है, जिससे संबंधों में सुधार के संकेत मिलते हैं।

उन्होंने बताया कि हाल के समय में सीमा प्रबंधन को लेकर कई तंत्र सक्रिय किए गए हैं, जिनमें विशेषज्ञ समूह, कार्य समूह और उच्चस्तरीय संवाद शामिल हैं। इसके अलावा कैलाश मानसरोवर यात्रा की बहाली, सीधी उड़ानों को फिर से शुरू करने की दिशा में कदम, सीमा व्यापार के लिए दर्रों को खोलने पर सहमति और वीजा प्रक्रिया में कुछ सहजता जैसे निर्णय भी सकारात्मक संकेत हैं।

सीमा प्रबंधन के लिए मजबूत तंत्र

जनरल द्विवेदी ने कहा कि वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर उत्पन्न होने वाले स्थानीय विवादों को मौजूदा तंत्रों के जरिए सुलझाया जाता है। इसके लिए सैन्य अधिकारियों के बीच बातचीत, हॉटलाइन, फ्लैग मीटिंग और कमांडर स्तर की बैठकें नियमित रूप से की जाती हैं।

इन व्यवस्थाओं से न केवल तनाव को कम करने में मदद मिलती है, बल्कि गश्त और अन्य सैन्य गतिविधियों को भी सुचारु रूप से संचालित किया जा रहा है।

सेना की प्राथमिकताएं स्पष्ट

सेना प्रमुख ने कहा कि भारतीय सेना की प्राथमिकताएं स्पष्ट हैं—LAC पर शांति और स्थिरता बनाए रखना, स्थानीय मुद्दों का शांतिपूर्ण समाधान करना और किसी भी संभावित खतरे से निपटने के लिए मजबूत सैन्य तैनाती बनाए रखना।

उन्होंने यह भी कहा कि उत्तरी सीमाओं पर बुनियादी ढांचे, रसद व्यवस्था और निगरानी क्षमताओं को लगातार मजबूत किया जा रहा है, ताकि किसी भी स्थिति में प्रभावी प्रतिक्रिया दी जा सके।

'शक्ति के जरिए शांति' की नीति

जनरल द्विवेदी ने दोहराया कि भारतीय सेना जहां भी आवश्यक हो, संवाद के लिए तैयार है, लेकिन उसका मूल सिद्धांत ‘शक्ति के जरिए शांति’ बना रहेगा। उन्होंने कहा कि एलएसी पर तैनाती मजबूत, सतर्क और पूरी तरह सक्षम है, जो देश की क्षेत्रीय अखंडता और राष्ट्रीय हितों की रक्षा करने में सक्षम रहेगी।