नई दिल्ली। देश में पेट्रोल और डीजल की खरीद-बिक्री पर हाल ही में लगाए गए अस्थायी प्रतिबंधों को सरकार ने वापस लेने का निर्णय लिया है। पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के चलते अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति व्यवस्था प्रभावित होने के बाद एहतियात के तौर पर ये कदम उठाए गए थे, जिन्हें अब हालात सामान्य होने के बाद समाप्त किया जा रहा है।
सरकारी आदेश के अनुसार, ईंधन से जुड़ी सभी पाबंदियां 1 जुलाई से पूरी तरह हट जाएंगी। इसके बाद देशभर में पेट्रोल पंपों और रिटेल आउटलेट्स पर सामान्य रूप से पेट्रोल और डीजल की उपलब्धता पहले की तरह बहाल हो जाएगी।
क्यों लगाए गए थे प्रतिबंध?
दरअसल, पश्चिम एशिया में जारी युद्ध की वजह से वैश्विक सप्लाई चेन पर असर पड़ा था। इसी कारण भारत में भी ईंधन आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता की स्थिति बन गई थी। संभावित कमी से बचने के लिए सरकार ने अस्थायी रूप से कुछ नियंत्रणात्मक कदम उठाए थे, ताकि घरेलू बाजार में स्थिरता बनी रहे।
किन नियमों में हुई थी सख्ती?
इन प्रतिबंधों का सबसे ज्यादा असर व्यावसायिक उपभोक्ताओं पर पड़ा था। कमर्शियल उपयोग के लिए ईंधन खरीदने वालों को सीधे पेट्रोल पंपों से खरीद पर रोक लगाई गई थी। साथ ही, डीजल की दैनिक खरीद सीमा भी तय कर दी गई थी, ताकि अनियंत्रित खपत को रोका जा सके।
1 जुलाई के बाद क्या बदलेगा?
नए आदेश के लागू होने के बाद व्यावसायिक उपभोक्ता फिर से सीधे रिटेल पंपों से ईंधन खरीद सकेंगे। डीजल पर लगी दैनिक सीमा भी खत्म कर दी जाएगी। इससे परिवहन और उद्योग क्षेत्र को राहत मिलने की उम्मीद है, क्योंकि ईंधन की उपलब्धता पहले की तरह सुचारू हो जाएगी और लॉजिस्टिक संचालन पर पड़ा दबाव कम होगा।