जलवायु कार्यकर्ता और इंजीनियर सोनम वांगचुक को शनिवार दोपहर राजस्थान के जोधपुर सेंट्रल जेल से रिहा कर दिया गया। यह कदम केंद्र सरकार द्वारा उनके खिलाफ जारी राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (एनएसए) के निरोध आदेश को तुरंत प्रभाव से रद्द करने के बाद उठाया गया। अधिकारियों ने बताया कि दोपहर लगभग 1:30 बजे वांगचुक को जेल से बाहर लाया गया।

सोनम वांगचुक को 26 सितंबर 2025 को लद्दाख के जिला मजिस्ट्रेट के आदेश पर एनएसए के तहत हिरासत में लिया गया था। इस दौरान वह लगभग 170 दिन तक जेल में रहे। रिहाई की प्रक्रिया में उनकी पत्नी गीतांजलि आंगमो भी मौजूद थीं और उन्होंने जरूरी औपचारिकताएं पूरी कीं।

सोनम वांगचुक की रिहाई पर राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने केंद्र सरकार की कार्रवाई पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि वांगचुक की रिहाई सुखद है, लेकिन जिस तरह उन्हें एनएसए के तहत जेल भेजा गया था, वह कई महत्वपूर्ण सवाल छोड़ गया। गहलोत ने सोशल मीडिया पर लिखा कि यह स्थिति विडंबनापूर्ण है। वांगचुक, जो कभी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीतियों के समर्थक रहे, उन्होंने लद्दाख में पर्यावरण और स्थानीय अधिकारों के मुद्दे उठाए, जिसके बाद कठोर कानूनों के तहत उनकी गिरफ्तारी हुई।

पूर्व मुख्यमंत्री ने यह भी सवाल उठाया कि अगर उनके खिलाफ ठोस सबूत नहीं थे, तो लगभग 170 दिन की हिरासत का हिसाब कौन देगा। गहलोत ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा कानून का उपयोग राजनीतिक हितों के आधार पर किया जाना लोकतंत्र के लिए चिंताजनक है। उनका कहना था कि कठोर कानूनों का इस्तेमाल केवल पारदर्शिता और सावधानी के साथ होना चाहिए। असहमति की आवाज को दबाने के लिए इनका प्रयोग लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता को कमजोर कर सकता है।

गहलोत ने आगे लिखा कि जनता इस दोहरे मापदंड को देख रही है और समय आने पर इसका जवाब भी मांगेगी।