मुजफ्फरनगर के मांडी गांव स्थित एक दोना-पत्तल फैक्ट्री में मजदूरों को कथित तौर पर बंधक बनाकर लंबे समय तक शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित किए जाने का मामला अब राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) तक पहुंच गया है। मामले को गंभीर मानते हुए आयोग ने उत्तर प्रदेश सरकार से जवाब तलब किया है और मुख्य सचिव तथा पुलिस महानिदेशक (DGP) से दो सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।

आयोग ने अपने निर्देश में कहा है कि यदि मीडिया रिपोर्टों में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह मानवाधिकारों के गंभीर उल्लंघन की श्रेणी में आता है। इसी के साथ NHRC ने जिला प्रशासन को निर्देश दिया है कि श्रम एवं रोजगार मंत्रालय की एसओपी और बंधुआ मजदूरी (उन्मूलन) अधिनियम-1976 के तहत पूरे प्रकरण की गहन जांच कराई जाए।


इसके अलावा आयोग ने यह भी सुनिश्चित करने को कहा है कि मुक्त कराए गए सभी श्रमिकों का पंजीकरण ई-श्रम पोर्टल पर तुरंत किया जाए, ताकि उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ मिल सके।

जानकारी के अनुसार, इस फैक्ट्री में उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, राजस्थान, हरियाणा, उत्तराखंड, छत्तीसगढ़ सहित कई राज्यों और नेपाल से आए मजदूरों को काम के बहाने लाया गया था। आरोप है कि वहां पहुंचने के बाद उनके मोबाइल फोन और पहचान पत्र छीन लिए गए और उन्हें कम भोजन व बिना उचित वेतन के लंबे समय तक काम करने के लिए मजबूर किया गया।

यह भी आरोप सामने आए हैं कि विरोध करने पर मजदूरों के साथ मारपीट की जाती थी और उन्हें भागने से रोकने के लिए कुत्तों का इस्तेमाल किया जाता था। बताया जाता है कि एक मजदूर किसी तरह वहां से भागकर तितावी थाने पहुंचा, जिसके बाद पुलिस ने छापेमारी कर अन्य मजदूरों को मुक्त कराया।


मेडिकल जांच में कई मजदूरों के शरीर पर गंभीर चोटों, पुराने घावों और फ्रैक्चर के निशान पाए जाने की बात सामने आई है। रिपोर्ट में एक मजदूर की मौत का भी उल्लेख है, जबकि अन्य संभावित मौतों को लेकर जांच जारी है।

NHRC द्वारा स्वतः संज्ञान लेने के बाद यह मामला अब जिला स्तर से आगे बढ़कर राष्ट्रीय निगरानी में आ गया है। अब सभी की नजरें राज्य सरकार की रिपोर्ट और आगे की जांच पर टिकी हैं।