तिरुवनंतपुरम नगर निगम की सोमवार को हुई परिषद बैठक उस समय तनाव और अफरातफरी में बदल गई जब भाजपा पार्षद सुगथन के खिलाफ चल रहे विवाद ने सदन के भीतर जोर पकड़ लिया। एलडीएफ पार्षद उनकी गिरफ्तारी के बाद लगातार इस्तीफे की मांग कर रहे हैं, जिसके चलते बैठक में तीखी नोकझोंक शुरू हुई और मामला हाथापाई तक पहुंच गया।
एलडीएफ पार्षदों ने बैठक के दौरान प्रदर्शन करते हुए भाजपा पार्षद सुगथन के इस्तीफे की मांग दोहराई। इसी बीच भाजपा और कांग्रेस के सदस्यों के बीच बहस इतनी बढ़ गई कि सदन का माहौल पूरी तरह बिगड़ गया और स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गई।
गिरफ्तारी बना विवाद की जड़
इस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत 10 जून को हुई थी, जब भाजपा पार्षद सुगथन को केरल असामाजिक गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (KAAPA) के तहत गिरफ्तार किया गया था। उन पर मंदिर उत्सव के दौरान कथित हमले से जुड़े आरोप हैं। इससे पहले उच्च न्यायालय ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी, जिसके बाद पुलिस ने कार्रवाई की थी। सुगथन पर पहले से भी कई आपराधिक मामले दर्ज बताए जाते हैं।
गिरफ्तारी के दौरान भी हुआ था तनाव
गिरफ्तारी के समय भी माहौल काफी तनावपूर्ण हो गया था। पुलिस जब उन्हें हिरासत में लेने पहुंची, तो भाजपा समर्थकों ने विरोध शुरू कर दिया। स्थिति इतनी बिगड़ गई कि भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को हवा में फायरिंग करनी पड़ी थी। इस दौरान सरकारी काम में बाधा और पुलिसकर्मियों पर हमले के आरोप में नए केस भी दर्ज किए गए थे।
इस्तीफे की मांग पर अड़ा एलडीएफ
एलडीएफ लगातार सुगथन के इस्तीफे की मांग कर रहा है और नगर निगम परिसर के बाहर प्रदर्शन भी कर रहा है। विपक्षी गठबंधन का कहना है कि गंभीर आपराधिक मामलों का सामना कर रहे पार्षद का पद पर बने रहना लोकतांत्रिक व्यवस्था की विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा करता है। इसी मांग को लेकर बैठक के दौरान विरोध तेज हुआ, पोस्टर लहराए गए और माहौल पूरी तरह गरमा गया।