सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (CBSE) ने तीन-भाषा नीति (Three-Language Policy) में अहम संशोधन करते हुए छात्रों के लिए नियमों को सरल किया है। नए दिशा-निर्देशों के तहत मौजूदा कक्षा 10 के विद्यार्थियों को अब तीसरी भाषा की बोर्ड परीक्षा देने से छूट मिल गई है। इस फैसले से बड़ी संख्या में छात्रों और अभिभावकों को राहत मिली है।

मौजूदा छात्रों पर लागू नहीं होगा नया नियम

CBSE ने स्पष्ट किया है कि वर्तमान शैक्षणिक सत्र में कक्षा 10 में पढ़ रहे छात्रों पर नई भाषा नीति लागू नहीं होगी। वे पहले की व्यवस्था के अनुसार ही पढ़ाई जारी रखेंगे और उन्हें तीसरी भाषा की बोर्ड परीक्षा नहीं देनी होगी।

इसके अलावा, कक्षा 7, 8 और 9 में अध्ययनरत छात्र, जो आगे चलकर कक्षा 10 में जाएंगे, उन्हें भी बोर्ड स्तर पर तीसरी भाषा की परीक्षा से छूट दी गई है।

तीन भाषाओं की पढ़ाई का नया ढांचा

नई नीति के अनुसार छात्रों को तीन भाषाएं पढ़नी होंगी, जिनमें से कम से कम दो भारतीय भाषाएं होना अनिवार्य है। तीसरी भाषा के रूप में भारतीय या विदेशी भाषा दोनों में से किसी एक को चुना जा सकता है।

जो छात्र पहले से दो विदेशी भाषाएं पढ़ रहे हैं, वे इसे जारी रख सकेंगे, लेकिन उन्हें साथ में एक भारतीय भाषा पढ़ना अनिवार्य होगा।

कक्षा 9 और 10 के लिए नियम

कक्षा 9 के छात्रों के लिए तीन भाषाएं पढ़ना अनिवार्य किया गया है। इनमें कम से कम दो भारतीय भाषाएं जरूरी होंगी। तीसरी भाषा के रूप में अंग्रेज़ी, फ्रेंच, जर्मन, स्पेनिश या अरबी जैसी विदेशी भाषा भी ली जा सकती है।

नीति के तहत विभिन्न स्थितियों में छात्रों को विकल्प दिए गए हैं—

  • अगर कोई छात्र दो भारतीय भाषाएं पढ़ रहा है, तो वह तीसरी भाषा के रूप में भारतीय या विदेशी भाषा चुन सकता है।
  • अगर एक भारतीय और एक विदेशी भाषा पढ़ी जा रही है, तो तीसरी भाषा भारतीय होना अनिवार्य होगा।
  • यदि दो विदेशी भाषाएं चुनी गई हैं, तो 2026-27 से एक भारतीय भाषा जोड़ना जरूरी होगा, हालांकि शुरुआती चरण में कुछ छूट दी गई है।

2026-27 से लागू होगी नई व्यवस्था

CBSE ने बताया कि यह संशोधित भाषा नीति शैक्षणिक सत्र 2026-27 से लागू की जाएगी। बोर्ड का उद्देश्य छात्रों को भारतीय भाषाओं से अधिक जोड़ना और बहुभाषी शिक्षा को बढ़ावा देना है, ताकि उनका समग्र शैक्षणिक विकास सुनिश्चित किया जा सके।