पेरिस/बर्लिन। यूरोप इस समय भीषण गर्मी की चपेट में है, जिसका असर अब सिर्फ मौसम तक सीमित नहीं रह गया है बल्कि इसका प्रभाव वहां के बुनियादी ढांचे (इंफ्रास्ट्रक्चर) पर भी साफ दिखाई देने लगा है। कई देशों में रिकॉर्ड तापमान के चलते सड़कें विकृत हो रही हैं, ट्राम ट्रैक मुड़ रहे हैं और परिवहन व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हो रही है।

गर्मी की इस लहर ने हाईवे नेटवर्क को नुकसान पहुंचाया है, ट्रेनों की रफ्तार धीमी पड़ गई है, बिजली ग्रिड पर अतिरिक्त दबाव बढ़ गया है और अस्पतालों में मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ी है। कई जगह तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से भी ऊपर पहुंच गया है।

यूरोप के कई देशों में टूटा तापमान रिकॉर्ड

पश्चिमी यूरोप में शुरू हुई हीटवेव अब मध्य और पूर्वी यूरोप तक फैल चुकी है। कई देशों में अब तक के तापमान रिकॉर्ड टूट गए हैं। डेनमार्क में 1874 के बाद सबसे गर्म दिन दर्ज किया गया, जहां ओडुम क्षेत्र में तापमान 37 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया।

स्विट्जरलैंड के बासेल में 38.8 डिग्री और चेक गणराज्य के डोक्सानी में 40.8 डिग्री सेल्सियस तापमान रिकॉर्ड किया गया, जो अब तक का सर्वाधिक है। वहीं ब्रिटेन में जून माह का सबसे गर्म दिन दर्ज हुआ, जहां तापमान 37.3 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया और 1976 का रिकॉर्ड टूट गया।

सड़कें पिघलीं, रेल नेटवर्क पर असर

जर्मनी में गर्मी का असर सड़क परिवहन पर गंभीर रूप से देखने को मिला। बर्लिन के पास A2 मोटरवे पर अत्यधिक तापमान के कारण कंक्रीट स्लैब टूट गए, जिससे कुछ हिस्सों में यातायात रोकना पड़ा। अन्य हाईवे पर भी इसी तरह की क्षति की खबरें सामने आई हैं।

फ्रांस में भी ट्रांसपोर्ट और सार्वजनिक सेवाओं पर असर पड़ा है। सड़कों के विकृत होने, बिजली आपूर्ति बाधित होने और ट्रेनों में देरी जैसी समस्याओं ने जनजीवन को प्रभावित किया है।

ऊर्जा व्यवस्था और अस्पतालों पर दबाव

फ्रांस की ऊर्जा कंपनी EDF ने बताया कि कूलिंग सिस्टम पर असर पड़ने के कारण कुछ परमाणु संयंत्रों की उत्पादन क्षमता घटाई गई है, हालांकि बिजली आपूर्ति अभी भी पर्याप्त है।

वहीं स्वास्थ्य सेवाओं पर भी दबाव बढ़ गया है। जर्मनी के डॉरमागेन में एक नर्सिंग होम से कई बुजुर्गों को सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट करना पड़ा, जहां तापमान 35 डिग्री तक पहुंच गया था। एक व्यक्ति की मौत की भी सूचना है, हालांकि कारण स्पष्ट नहीं है।

फ्रांस में अस्पतालों में गर्मी से जुड़ी आपात स्थितियों में वृद्धि देखी गई है। पेरिस समेत कई क्षेत्रों में अलर्ट जारी है और इमरजेंसी सेवाओं पर मरीजों का बोझ सामान्य से कहीं अधिक बढ़ गया है।

कई देशों में हीट अलर्ट जारी

इटली में रोम, मिलान, फ्लोरेंस, वेनिस और बोलोग्ना सहित 18 शहरों में रेड अलर्ट जारी है। लोग गर्मी से बचने के लिए छायादार स्थानों और फव्वारों का सहारा ले रहे हैं।

ब्रिटेन में भी एम्बर हीट वॉर्निंग जारी है, हालांकि तापमान में हल्की गिरावट की उम्मीद जताई गई है। इसी बीच कुछ स्थानों पर जलस्रोतों में डूबने से मौत के मामले भी सामने आए हैं, जिसके बाद अधिकारियों ने सावधानी बरतने की अपील की है।

जनजीवन पर व्यापक असर

भीषण गर्मी का असर केवल मौसम तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इससे परिवहन, ऊर्जा, स्वास्थ्य और सार्वजनिक जीवन सभी प्रभावित हुए हैं। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में सड़कें विकृत होती और इंफ्रास्ट्रक्चर पर बढ़ते दबाव की तस्वीरें साफ देखी जा सकती हैं।