पश्चिम एशिया में ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने वैश्विक वित्तीय बाजारों में अनिश्चितता बढ़ा दी है। इसका सीधा असर सोमवार को भारतीय शेयर बाजार पर भी देखने को मिला, जहां लगातार दो सत्रों की तेजी के बाद भारी बिकवाली का माहौल बन गया। निवेशकों में बढ़ी घबराहट के चलते घरेलू बाजारों के साथ-साथ वैश्विक बाजार भी दबाव में आ गए।

सेंसेक्स, निफ्टी और रुपये में गिरावट

सोमवार के कारोबार के अंत में बीएसई सेंसेक्स 372.10 अंक यानी 0.48% गिरकर 76,728.37 पर बंद हुआ। वहीं एनएसई निफ्टी 109.75 अंक (0.46%) टूटकर 23,946.25 के स्तर पर पहुंच गया।

मुद्रा बाजार में भी कमजोरी दिखी और रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 9 पैसे टूटकर 94.54 (अनुमानित स्तर) पर बंद हुआ।

ब्रॉडर मार्केट पर भी दबाव

मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी बिकवाली का असर दिखा। निफ्टी मिडकैप 100 और स्मॉलकैप 100 दोनों करीब 0.6% तक फिसले।

सेक्टोरल इंडेक्स में ऑटो सेक्टर सबसे ज्यादा दबाव में रहा और इसमें 2% से अधिक की गिरावट दर्ज की गई। इसके उलट फार्मा सेक्टर ने मजबूती दिखाई और यह 1% से ज्यादा की बढ़त के साथ बंद हुआ।

किन शेयरों पर सबसे ज्यादा असर

एनएसई पर कुल 2,036 शेयरों में गिरावट रही, जबकि 1,330 शेयर बढ़त के साथ बंद हुए।

प्रमुख कंपनियों में अडाणी एंटरप्राइजेज और महिंद्रा एंड महिंद्रा के शेयर करीब 2% तक टूट गए। बैंकिंग सेक्टर में कोटक महिंद्रा बैंक में भी 3% से अधिक की गिरावट दर्ज की गई, जिसका कारण एमडी और सीईओ के पद छोड़ने की घोषणा रही।

इसके अलावा मारुति, एलएंडटी, अल्ट्राटेक सीमेंट और इंटरग्लोब एविएशन जैसे बड़े शेयर भी दबाव में रहे।

ग्लोबल मार्केट का हाल

अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी जोखिम से बचने की प्रवृत्ति हावी रही।

एशियाई बाजारों में जापान का टॉपिक्स इंडेक्स 4.6% तक गिर गया, जबकि हांगकांग का हैंग सेंग 2.8% और ऑस्ट्रेलिया का ASX 200 2.2% कमजोर हुआ। शंघाई कंपोजिट भी 1.4% नीचे बंद हुआ।

अमेरिकी और यूरोपीय फ्यूचर्स में भी हल्की कमजोरी देखने को मिली।

कच्चे तेल में उछाल

भू-राजनीतिक तनाव के चलते कच्चे तेल की कीमतों में तेजी दर्ज की गई। ब्रेंट क्रूड 1.51% बढ़कर 73.09 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गया।

आगे बाजार की दिशा

विश्लेषकों के मुताबिक, जब तक पश्चिम एशिया में तनाव की स्थिति साफ नहीं होती, तब तक वैश्विक बाजारों में अस्थिरता और दबाव बने रहने की संभावना है। निवेशक फिलहाल जोखिम लेने से बच रहे हैं, जिसका असर आने वाले कारोबारी सत्रों में भी देखने को मिल सकता है।