कोलकाता। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों ने राज्य की राजनीति में बड़ा उलटफेर कर दिया है। भारतीय जनता पार्टी ने ऐतिहासिक प्रदर्शन करते हुए 200 से अधिक सीटों पर बढ़त हासिल की और राज्य में स्पष्ट बहुमत प्राप्त कर लिया। यह पहली बार है जब भाजपा ने पश्चिम बंगाल में इतनी बड़ी जीत दर्ज की है।
चुनाव परिणामों के अनुसार, भाजपा ने 204 सीटों पर जीत दर्ज की, जबकि दो सीटों पर पार्टी आगे चल रही थी। इसके मुकाबले 2021 में भाजपा को केवल 77 सीटें मिली थीं। इस बार पार्टी का वोट शेयर भी बढ़कर लगभग 45.85 प्रतिशत तक पहुंच गया।
वहीं, 15 वर्षों से सत्ता में रही तृणमूल कांग्रेस को इस चुनाव में बड़ा झटका लगा। पार्टी मात्र 74 से 81 सीटों के बीच सिमट गई और उसका वोट प्रतिशत लगभग 40.80 प्रतिशत रहा। 2021 में टीएमसी ने 215 सीटों के साथ भारी बहुमत हासिल किया था, लेकिन इस बार स्थिति पूरी तरह बदल गई।
ममता बनर्जी को बड़ा राजनीतिक झटका
चुनाव में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को व्यक्तिगत रूप से भी हार का सामना करना पड़ा। भवानीपुर सीट पर उन्हें भाजपा के सुवेंदु अधिकारी से 15,105 वोटों के अंतर से हार मिली। सुवेंदु को 73,917 वोट मिले, जबकि ममता बनर्जी को 58,812 वोट प्राप्त हुए।
सुवेंदु अधिकारी ने न केवल भवानीपुर, बल्कि नंदीग्राम सीट पर भी जीत दर्ज की, जहां उन्होंने तृणमूल उम्मीदवार को 9,665 वोटों से हराया।
टीएमसी के कई बड़े नेता चुनाव हारे
इस चुनाव में तृणमूल कांग्रेस के कई वरिष्ठ मंत्री और नेता भी हार गए। इनमें शशि पांजा, ब्रात्य बसु, अरूप बिस्वास, मानस भुइयां, मलय घटक, सुजीत बोस, उदयन गुहा, चंद्रिमा भट्टाचार्य और ज्योतिप्रिय मल्लिक जैसे प्रमुख नाम शामिल हैं।
कई जिलों में टीएमसी का खाता भी नहीं खुला
इस बार चुनाव में तृणमूल कांग्रेस आठ जिलों में एक भी सीट नहीं जीत पाई। इनमें अलीपुरद्वार, कलिम्पोंग, पुरुलिया, बांकुड़ा, झाड़ग्राम, जलपाईगुड़ी, पूर्व मेदिनीपुर और दार्जिलिंग शामिल हैं।
इसके अलावा मालदा, मुर्शिदाबाद, उत्तर दिनाजपुर और दक्षिण 24 परगना जैसे जिलों में भी पार्टी को भारी नुकसान हुआ। वहीं इन क्षेत्रों में भाजपा ने मजबूत पकड़ बनाई।
कोलकाता में भी बदला राजनीतिक समीकरण
राजधानी कोलकाता में भी टीएमसी को बड़ा झटका लगा। टॉलीगंज, मानिकतला, रासबिहारी, जोड़ासांको, श्यामपुकुर और जादवपुर जैसी अहम सीटें भाजपा के खाते में चली गईं।
भाजपा के प्रमुख विजेता उम्मीदवार
इस चुनाव में भाजपा के कई बड़े नेता जीतकर विधानसभा पहुंचे। इनमें निशिथ प्रमाणिक, दिलीप घोष, रूपा गांगुली, अग्निमित्रा पाल, दिब्येंदु अधिकारी और हिरन चटर्जी प्रमुख नाम हैं।
कांग्रेस और वामदल की आंशिक वापसी
लंबे समय बाद कांग्रेस और वाममोर्चा ने भी कुछ सीटों पर जीत दर्ज की। माकपा को 1 सीट और कांग्रेस को 2 सीटें मिलीं। हालांकि 2021 में दोनों पार्टियां एक भी सीट नहीं जीत पाई थीं।
जीत के प्रमुख कारण
भाजपा ने अपने प्रचार अभियान में विकास, रोजगार, घुसपैठ और सुशासन को मुख्य मुद्दा बनाया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और केंद्र की योजनाओं का भी बड़ा प्रभाव देखने को मिला।
साथ ही महिलाओं की सुरक्षा, आरजी कर मेडिकल कॉलेज की घटना और संदेशखाली विवाद जैसे मुद्दों ने भी चुनावी माहौल को प्रभावित किया।
टीएमसी की हार के कारण
विश्लेषकों के अनुसार, टीएमसी की हार के पीछे 15 साल की सत्ता विरोधी लहर, भ्रष्टाचार के आरोप, सिंडिकेट राज, कट मनी की संस्कृति और संगठनात्मक कमजोरी प्रमुख कारण रहे।