मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने कांग्रेस विधायक निर्मला सप्रे के खिलाफ दल-बदल कानून के तहत कार्रवाई की मांग को लेकर दायर याचिका पर अपना निर्णय सुरक्षित रख लिया है। यह याचिका विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने दायर की है।

सुनवाई के दौरान विधायक निर्मला सप्रे की ओर से अदालत में स्पष्ट किया गया कि वह कांग्रेस की सदस्य थीं, हैं और आगे भी पार्टी में ही बनी रहेंगी। हाईकोर्ट की खंडपीठ—कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विवेक रूसिया और न्यायमूर्ति प्रदीप मित्तल—ने इस बयान को रिकॉर्ड में लेते हुए आगे का आदेश सुरक्षित रख लिया।

याचिका में उमंग सिंघार ने मांग की है कि बीना से कांग्रेस विधायक निर्मला सप्रे का निर्वाचन दल-बदल कानून के तहत अमान्य घोषित किया जाए। याचिकाकर्ता के अनुसार, 30 जून 2024 को इस संबंध में विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष आवेदन दिया गया था, लेकिन 90 दिन की निर्धारित समय-सीमा के बावजूद कोई निर्णय नहीं लिया गया, जिसके बाद मामला हाईकोर्ट पहुंचा।

आरोपों के मुताबिक, विधायक सप्रे पर पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने का दावा किया गया है। याचिका में यह भी उल्लेख है कि लोकसभा चुनाव के दौरान 5 मई 2024 को राहतगढ़ में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के कार्यक्रम में उनकी उपस्थिति को पार्टी लाइन के खिलाफ गतिविधि बताया गया है। साथ ही आरोप है कि उन्होंने भाजपा के पक्ष में सक्रिय भूमिका निभाई, जबकि उन्होंने विधायकी से इस्तीफा नहीं दिया।

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि भाजपा की ओर से उन्हें आधिकारिक रूप से सदस्यता नहीं दी गई है और मामला अभी विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष लंबित है, जिसकी अगली सुनवाई 30 जून को निर्धारित है।

वहीं, याचिकाकर्ता पक्ष ने तर्क दिया कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार ऐसे मामलों का निर्णय 90 दिनों के भीतर होना चाहिए था, लेकिन देरी के कारण न्यायिक हस्तक्षेप आवश्यक हो गया। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया।