मेरठ नगर निगम इन दिनों विकास कार्यों से अधिक अधिकारियों के बीच चल रही पद और कक्ष को लेकर खींचतान के कारण सुर्खियों में है। मुख्य वित्त एवं लेखाधिकारी के रिक्त पद और उसके नियंत्रण को लेकर पिछले कई दिनों से दो अधिकारियों के बीच विवाद जारी है, जो बृहस्पतिवार को खुले तौर पर सामने आ गया।

नगर निगम में मुख्य वित्त एवं लेखाधिकारी का पद 31 मई से खाली है। इस पद पर कार्यभार को लेकर विवाद तब शुरू हुआ जब लेखाधिकारी कृष्ण बिहारी पाठक ने पिछले सप्ताह खाली पड़े कार्यालय कक्ष में बैठना शुरू कर दिया। इसके बाद नगर आयुक्त सौरभ गंगवार के निर्देश पर अपर नगर आयुक्त पंकज कुमार को लेखा विभाग का वरिष्ठ प्रभारी नियुक्त किया गया और उनके नाम की नेमप्लेट भी कार्यालय के बाहर लगा दी गई।

इसके बावजूद कृष्ण बिहारी पाठक उसी कक्ष में बैठते रहे, जिससे स्थिति और तनावपूर्ण हो गई।

बृहस्पतिवार को मामला उस समय और बढ़ गया जब लेखा विभाग के कर्मचारियों ने संबंधित कार्यालय पर नया ताला लगा दिया। दोपहर में जब लेखाधिकारी कार्यालय पहुंचे तो उन्हें बताया गया कि चाबी अपर नगर आयुक्त के पास है। इससे नाराज होकर उन्होंने गलियारे में ही मेज-कुर्सी लगवाकर वहीं बैठने का निर्णय लिया।

एक वरिष्ठ अधिकारी को इस तरह कार्यालय के बाहर बैठा देखकर निगम परिसर में कर्मचारियों और अन्य अधिकारियों के बीच चर्चा का माहौल बन गया।

करीब आधे घंटे तक चले इस घटनाक्रम के बाद लेखाधिकारी अपने मूल कार्यालय लौट गए। इसके बाद कर्मचारियों ने उनसे बातचीत कर मामले को आगे न बढ़ाने की अपील की। हालांकि लेखाधिकारी ने स्पष्ट किया कि लेखा विभाग का दायित्व नियमों के अनुसार उन्हें ही मिलना चाहिए और वर्तमान व्यवस्था पर उन्होंने असंतोष जताया।

अपर नगर आयुक्त पंकज कुमार ने मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि कार्यालय कक्ष आवंटन को लेकर कोई विवाद नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि नगर निगम में कक्ष आवंटन का अधिकार केवल नगर आयुक्त के पास है और सभी अधिकारियों को उनके निर्धारित कक्ष आवंटित हैं। किसी भी प्रकार का बदलाव केवल लिखित आदेश के माध्यम से ही किया जा सकता है।