अमित शाह से मुलाकात के बाद अन्नामलाई का रुख नरम, पीएम मोदी से करेंगे चर्चा

नई दिल्ली। तमिलनाडु भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष के. अन्नामलाई के इस्तीफे को लेकर चल रहा सियासी विवाद फिलहाल टलता नजर आ रहा है। गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह से मुलाकात के बाद उनके रुख में नरमी आई है। अब अन्नामलाई प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के बाद ही अपने इस्तीफे पर अंतिम फैसला लेंगे।
दिल्ली में लगातार बैठकों का दौर
सूत्रों के अनुसार, अन्नामलाई ने इससे पहले भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन और संगठन महासचिव बी.एल. संतोष से भी मुलाकात की थी। इन बैठकों में तमिलनाडु की मौजूदा राजनीतिक स्थिति, हालिया चुनावी परिणाम और पार्टी की भविष्य की रणनीति पर विस्तार से चर्चा हुई।
कोयंबटूर से जनसंपर्क अभियान पर भी चर्चा
बैठक के दौरान अन्नामलाई ने पार्टी से अलग होकर कोयंबटूर से एक बड़ा जनसंपर्क अभियान शुरू करने की बात भी रखी। हालांकि, अमित शाह ने सुझाव दिया कि यह अभियान भाजपा के संगठनात्मक ढांचे के भीतर रहकर चलाया जाए ताकि इसका प्रभाव और बढ़ सके।
सूत्रों के मुताबिक, अन्नामलाई ने प्रदेश भाजपा नेतृत्व पर एआईएडीएमके और डीएमके के साथ अंदरूनी सांठगांठ के आरोप लगाते हुए अपनी नाराजगी भी जताई।
अमित शाह ने दिया संगठनात्मक समर्थन का भरोसा
अमित शाह ने अन्नामलाई को भरोसा दिलाया कि केंद्रीय नेतृत्व पूरी तरह उनके साथ खड़ा है और यदि जरूरत पड़ी तो प्रदेश संगठन को स्पष्ट दिशा-निर्देश भी दिए जाएंगे। पार्टी सूत्रों ने यह भी स्पष्ट किया है कि अन्नामलाई द्वारा दिए गए कथित पांच पन्नों के इस्तीफे की खबरें सही नहीं हैं।
इस्तीफे पर अंतिम फैसला पीएम से मुलाकात के बाद
बताया जा रहा है कि नितिन नवीन और बी.एल. संतोष से मुलाकात के दौरान अन्नामलाई ने अपने इस्तीफे की इच्छा जरूर जताई थी, लेकिन दोनों नेताओं ने उन्हें अंतिम निर्णय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बातचीत के बाद लेने की सलाह दी।
संगठन में नई भूमिका की संभावना
अन्नामलाई के रुख में नरमी आने के बाद भाजपा में उनकी भविष्य की भूमिका को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं। संभावना जताई जा रही है कि उन्हें फिर से प्रदेश अध्यक्ष बनाया जा सकता है या फिर केंद्रीय संगठन में कोई महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी जा सकती है। अंतिम फैसला पीएम मोदी से मुलाकात के बाद ही होगा।
पहले से चल रहा था असंतोष
गौरतलब है कि अन्नामलाई विधानसभा चुनाव से पहले एआईएडीएमके के साथ गठबंधन और प्रदेश नेतृत्व में बदलाव को लेकर नाराज चल रहे थे। इसी प्रक्रिया के तहत उन्हें प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाकर नयनार नागेंद्रन को यह जिम्मेदारी सौंपी गई थी।
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