यूपी में जल्द लागू होगी CSC 4.0 योजना, हर ग्राम पंचायत में खुलेंगे कम से कम दो जनसेवा केंद्र

HIGHLIGHTS
- हर जिले में दो डिस्ट्रिक्ट सर्विस प्रोवाइडर चुने जाएंगे
- योग्य वीएलई को नई व्यवस्था में प्राथमिकता मिलेगी
- सीएससी 4.0 योजना तीन साल के लिए लागू होगी
प्रदेश सरकार ने लोगों को उनके घर के नजदीक पारदर्शी, सुरक्षित और समयबद्ध डिजिटल सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए बड़ा फैसला लिया है। राज्य में जल्द ही कॉमन सर्विस सेंटर 4.0 परियोजना शुरू की जाएगी। नई व्यवस्था के तहत प्रत्येक जिले में खुली और प्रतिस्पर्धी ई-निविदा प्रक्रिया के माध्यम से दो डिस्ट्रिक्ट सर्विस प्रोवाइडर का चयन किया जाएगा। इससे जुड़े प्रस्ताव को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है।
आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स मंत्री सुनील शर्मा ने बताया कि प्रस्तावित सीएससी 4.0 योजना के तहत प्रदेश की प्रत्येक ग्राम पंचायत में कम से कम दो जनसेवा केंद्र संचालित किए जाएंगे। इनमें से एक केंद्र का संचालन पंचायत सचिवालय में पंचायत सहायक के माध्यम से अनिवार्य रूप से किया जाएगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वर्तमान में कार्यरत योग्य वीएलई (विलेज लेवल इंटरप्रैन्योर्स) की सेवाएं जारी रहेंगी और नई व्यवस्था में उन्हें प्राथमिकता दी जाएगी।
पूरी योजना पीपीपी मॉडल पर संचालित होगी, जिससे राज्य सरकार पर कोई अतिरिक्त वित्तीय भार नहीं पड़ेगा। शुरुआत में परियोजना की अवधि तीन वर्ष रखी गई है। आवश्यकता पड़ने पर इसे अगले दो वर्षों के लिए बढ़ाया जा सकेगा।
सेंटर फॉर ई-गवर्नेंस राज्य स्तर पर नोडल संस्था के रूप में नीति निर्धारण, तकनीकी मानकीकरण और निगरानी का काम करेगा। वहीं, राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र ई-डिस्ट्रिक्ट पोर्टल के तकनीकी उन्नयन और आधुनिक डिजिटल सुविधाओं के एकीकरण को सुनिश्चित करेगा। जिला स्तर पर योजना के प्रभावी क्रियान्वयन और निगरानी की जिम्मेदारी डिस्ट्रिक्ट ई-गवर्नेंस सोसाइटी की होगी।
3 लाख से ज्यादा छूटे छात्रों को शुल्क भरपाई का रास्ता साफ
कैबिनेट ने वर्ष 2025-26 में छात्रवृत्ति के साथ शुल्क भरपाई से वंचित रह गए पात्र छात्रों के लिए प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इन छात्रों के लिए छात्रवृत्ति पोर्टल दोबारा खोला जाएगा। ऐसे छात्रों की कुल संख्या 3 लाख 16 हजार 57 है। इस पर 551.85 करोड़ रुपये का व्यय-भार आएगा।
इनमें एससी, एसटी, सामान्य, अन्य पिछड़ा और अल्पसंख्यक वर्ग के छात्र शामिल हैं। सामान्य, ओबीसी और अल्पसंख्यक वर्ग के छात्रों के लिए देयता अगले वित्त वर्ष में बकाया न रहने का प्रावधान है। वित्त वर्ष समाप्त होने के बाद संबंधित विभागों पर देयता का भार नहीं रहता है। इसी वजह से इस प्रस्ताव को कैबिनेट के सामने लाया गया।
शिक्षण संस्थानों, विश्वविद्यालयों और संबद्धता देने वाली एजेंसियों के स्तर पर मास्टर डाटा लॉक नहीं होने के कारण ये छात्र योजना का लाभ नहीं ले सके थे। इसके अलावा डीएलएड आदि का परीक्षा परिणाम समय पर जारी न होने, पीएफएमएस से आवेदन रिजेक्ट होने, फीस जमा न होने, जिलास्तरीय समिति के स्तर पर आवेदन लंबित रहने या ट्रांजेक्शन फेल होने के कारण भी भुगतान नहीं हो पाया था।
छोटे शहरों में आईटी पार्क बनाने का रास्ता साफ
राज्य सरकार ने सूचना प्रौद्योगिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी जनित सेवा नीति-2022 में कई महत्वपूर्ण संशोधनों को मंजूरी दी है। इनका उद्देश्य राज्य में निवेश आकर्षित करना, नवाचार को बढ़ावा देना और बड़े स्तर पर उच्च गुणवत्ता वाले रोजगार के अवसर पैदा करना है। इससे छोटे शहरों में भी आईटी पार्क स्थापित करने का रास्ता साफ हो गया है।
संशोधनों के माध्यम से उप्र ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (जीसीसी) नीति और अन्य प्रगतिशील राज्यों की नीतियों की तर्ज पर प्रतिस्पर्धी और आकर्षक निवेश वातावरण तैयार किया जाएगा। संशोधित नीति में प्रदेश में पहले से संचालित और भविष्य में स्थापित होने वाली लघु, मध्यम और वृहद आईटी/आईटीईएस इकाइयों के विकास के लिए पात्रता मानकों को सरल और लचीला बनाया गया है।
अब पात्रता के लिए केवल पूंजी निवेश आधारित मॉडल के साथ रोजगार सृजन और व्यवसायिक क्षमता को भी प्रमुख आधार माना जाएगा। इसका लाभ टियर-2 और टियर-3 शहरों में काम कर रहे स्टार्टअप्स और नई आईटी कंपनियों को मिलेगा।
आईटी पार्क और आईटी सिटी स्थापित करने के लिए जरूरी न्यूनतम भूमि क्षेत्र की अनिवार्यता को भी तर्कसंगत और व्यावहारिक बनाया गया है। स्टार्टअप्स, नए उद्यमियों और सूक्ष्म एवं लघु आईटी इकाइयों को किफायती कार्यस्थल उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया गया है। इसके लिए को-वर्किंग स्पेस डेवलपर्स को नीति के तहत सरकार की ओर से कैपिटल असिस्टेंस दिया जाएगा।
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