हंगामे के चलते लोकसभा की कार्यवाही कल तक के लिए स्थगित, पीएम मोदी का भाषण टला

दिल्ली। संसद के बजट सत्र के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव लगातार तेज होता जा रहा है। सदन में चर्चा की जगह आरोप-प्रत्यारोप हावी नजर आए। पूर्व थलसेना प्रमुख एमएम नरवणे की पुस्तक को लेकर शुरू हुआ विवाद देखते-ही-देखते राजनीतिक संग्राम में बदल गया। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इस किताब का हवाला देते हुए चीन की घुसपैठ के मुद्दे पर सरकार को घेरने की कोशिश की, तो जवाब में भाजपा सांसद निशिकांत दुबे भी पुस्तकें लेकर लोकसभा पहुंच गए।
किताबों के जरिए एक-दूसरे पर वार से सदन का माहौल और गरमा गया। हालात इतने बिगड़े कि शाम पांच बजे प्रस्तावित प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भाषण भी नहीं हो सका। दिनभर के शोर-शराबे और हंगामे के बाद लोकसभा की कार्यवाही स्थगित कर दी गई और अब सदन की अगली बैठक कल होगी।
इससे पहले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने संसद भवन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। यह बैठक लोकसभा में प्रधानमंत्री के संभावित संबोधन से पहले हुई। अमित शाह ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से भी चर्चा की, जिसमें भाजपा सांसद निशिकांत दुबे भी मौजूद रहे। बावजूद इसके, सदन में जारी गतिरोध खत्म नहीं हो सका।
निशिकांत दुबे के बयान से बढ़ा विवाद
लोकसभा में भाजपा सांसद निशिकांत दुबे के बयान के बाद स्थिति और तनावपूर्ण हो गई। उन्होंने गांधी परिवार से जुड़ी किताबों का उल्लेख करते हुए उन पर आपत्तिजनक टिप्पणियों का आरोप लगाया। उनके इस बयान पर विपक्षी सांसदों ने तीखी आपत्ति जताई, जिसके चलते सदन में भारी हंगामा हुआ और कार्यवाही रोकनी पड़ी।
इसके बाद कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के सांसद लोकसभा अध्यक्ष के कक्ष में पहुंचे। उनका कहना था कि यदि राहुल गांधी को एक किताब के आधार पर बोलने से रोका गया, तो भाजपा सांसद को सदन में ऐसा करने की अनुमति क्यों दी गई।
पीएम के सदन में आने को लेकर संशय
विवाद के बीच कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सरकार पर हमले जारी रखे। उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात को देखते हुए उन्हें नहीं लगता कि प्रधानमंत्री आज संसद में आएंगे। राहुल गांधी नरवणे की किताब लेकर संसद पहुंचे थे और उनका कहना था कि यदि प्रधानमंत्री सदन में आते हैं, तो वह उन्हें यह पुस्तक सौंपेंगे।
दिनभर चले इस राजनीतिक टकराव के बाद संसद का माहौल पूरी तरह गर्म रहा और बजट सत्र की कार्यवाही बिना किसी ठोस निष्कर्ष के स्थगित करनी पड़ी।
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