डूंगरपुर: जर्जर स्कूल की छत भरभराकर गिरी, 120 विद्यार्थी और शिक्षक थे मौजूद

HIGHLIGHTS
- स्कूल परिसर में कुल 10 कमरे बताए गए
- दो कमरों को पहले ही असुरक्षित घोषित किया गया था
- जर्जर कमरों की मरम्मत के प्रस्ताव भेजे जा चुके हैं
डूंगरपुर: दोवड़ा ब्लॉक की ग्राम पंचायत सत्तु देवकी स्थित उच्च प्राथमिक स्कूल में जर्जर कमरे की छत अचानक भरभराकर गिर गई। घटना के समय स्कूल में करीब 120 विद्यार्थी और शिक्षक मौजूद थे। राहत की बात रही कि जिस कमरे की छत गिरी, उसे सुरक्षा कारणों के चलते पिछले एक साल से बंद रखा गया था। इससे बड़ा हादसा होने से टल गया।
सुबह करीब 10 बजे स्कूल में नियमित कक्षाएं चल रही थीं। शिक्षक बच्चों को पढ़ा रहे थे, तभी बंद पड़े जर्जर कमरे की छत तेज आवाज के साथ अचानक ढह गई। छत गिरने की आवाज सुनते ही स्कूल परिसर में अफरा-तफरी मच गई। घबराए बच्चे और शिक्षक कमरों से बाहर निकल आए।
शिक्षकों ने घटना की जानकारी तत्काल पीईईओ पंकज वर्मा को दी। सूचना मिलते ही पीईईओ पंकज वर्मा और सीबीईओ दीपक शाह मौके पर पहुंचे और घटनास्थल का निरीक्षण किया। अधिकारियों ने स्कूल प्रबंधन से घटना की जानकारी लेने के साथ अन्य जर्जर कमरों की स्थिति भी देखी।
दो कमरे जर्जर, एक की छत गिरी
स्कूल प्रबंधन के अनुसार, स्कूल परिसर में कुल 10 कमरे हैं। इनमें से दो कमरे लंबे समय से जर्जर स्थिति में हैं। सुरक्षा को देखते हुए दोनों कमरों को असुरक्षित घोषित कर दिया गया था और पिछले एक साल से इनमें विद्यार्थियों को नहीं बैठाया जा रहा था। सोमवार को इनमें से एक कमरे की छत गिर गई, जबकि दूसरा कमरा भी जर्जर हालत में है।
मरम्मत के लिए भेजे प्रस्ताव
सीबीईओ दीपक शाह ने बताया कि जर्जर कमरों की मरम्मत और नई छत डालने के लिए प्रस्ताव भेजे जा चुके हैं। मंजूरी मिलने के बाद जरूरी काम कराया जाएगा। उन्होंने बताया कि समय रहते जर्जर कमरों को बंद कर दिए जाने के कारण हादसे में किसी छात्र या शिक्षक को चोट नहीं आई।
बरामदे में पढ़ने को मजबूर विद्यार्थी
वहीं, जिले की ग्राम पंचायत चुंडावाड़ा स्थित राजकीय महात्मा गांधी विद्यालय का भवन भी जर्जर स्थिति में है। इससे विद्यार्थियों की सुरक्षा को लेकर खतरा बना हुआ है। लोक निर्माण विभाग ने पिछले वर्ष जुलाई में भवन की जांच की थी। जांच में 13 कक्षा-कक्षों में से 8 को पूरी तरह जर्जर घोषित किया गया था, जबकि 3 कक्षा-कक्षों को बड़े स्तर पर मरम्मत योग्य बताया गया था।
जर्जर घोषित किए गए 8 कमरों में विद्यार्थियों के प्रवेश पर पूरी तरह रोक है। इसके चलते विद्यालय के पास सिर्फ 2 सुरक्षित कक्षा-कक्ष उपलब्ध हैं। एक-एक कमरे में दो से तीन कक्षाओं के विद्यार्थियों को एक साथ बैठाकर पढ़ाया जा रहा है, जबकि कई विद्यार्थियों की कक्षाएं बरामदों में संचालित हो रही हैं। ग्रामीणों ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर स्कूल के लिए जल्द नए भवन या अतिरिक्त कक्षा-कक्षों की स्वीकृति जारी करने की मांग की है।
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