मॉस्को में पुतिन से मिले जयशंकर, पीएम मोदी का खास संदेश सौंपा

HIGHLIGHTS
- मॉस्को में हुई दोनों नेताओं के बीच मुलाकात
- आर्थिक सहयोग और व्यापार पर हुई चर्चा
- ऊर्जा, उर्वरक और परमाणु क्षेत्र पर भी बातचीत
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने सोमवार को मॉस्को में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विशेष संदेश पुतिन को सौंपा। जयशंकर ने कहा, "मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से शुभकामनाएं देकर अपनी बात शुरू करना चाहता हूं। उन्होंने आपको देने के लिए मुझे एक व्यक्तिगत संदेश दिया है, जिसे मैं आपको सौंपना चाहता हूं।"
उन्होंने कहा कि अंतर-सरकारी आयोग की बैठक हुई और कुल मिलाकर उनके पास पुतिन को बताने के लिए एक अच्छी रिपोर्ट है। जयशंकर ने कहा कि आर्थिक सहयोग, व्यापार, ऊर्जा, उर्वरक, परमाणु और अन्य क्षेत्रों में भी काफी प्रगति हुई है। उन्होंने इन सभी विषयों पर विस्तार से चर्चा करने की बात कही।
भारत-रूस संबंधों पर क्या बोले विदेश मंत्री जयशंकर?
एस जयशंकर ने कहा कि दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग काफी तेजी से बढ़ा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एससीओ शिखर सम्मेलन में पुतिन से मिलने और फिर ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिए भारत में उनका स्वागत करने के लिए उत्सुक हैं। इसके बाद उचित समय पर दोनों नेताओं की सुविधा के अनुसार वार्षिक शिखर सम्मेलन आयोजित किया जाएगा।
जयशंकर ने कहा कि भारत और रूस के बीच सहयोग की तस्वीर काफी मजबूत है।
विदेश मंत्री रविवार को रूस के दो दिवसीय आधिकारिक दौरे पर मॉस्को पहुंचे थे। सोमवार को उन्होंने भारत-रूस व्यापार, आर्थिक, वैज्ञानिक, तकनीकी एवं सांस्कृतिक सहयोग पर अंतर-सरकारी आयोग (आईआरआईजीसी-टीईसी) के 27वें सत्र की सह-अध्यक्षता की। उन्होंने रूस के प्रथम उप प्रधानमंत्री डेनिस मंटुरोव के साथ बैठक की सह-अध्यक्षता की।
रूस के डिप्टी पीएम मंटुरोव से किन मुद्दों पर की चर्चा?
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने सोमवार को रूस के प्रथम उप प्रधानमंत्री डेनिस मंटुरोव के साथ द्विपक्षीय व्यापार और आर्थिक सहयोग को आगे बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा की। दोनों नेताओं ने भारत-रूस साझेदारी की भी समीक्षा की।
यह यात्रा ऐसे समय हो रही है जब रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के 12-13 सितंबर को ब्रिक्स नेताओं के शिखर सम्मेलन के लिए नई दिल्ली आने की उम्मीद है। भारत और रूस आर्थिक संबंधों को और मजबूत करने तथा विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की दिशा में काम कर रहे हैं, ऐसे में यह बैठक महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
मंटुरोव के साथ कार्यक्रम की सह-अध्यक्षता करते हुए जयशंकर ने कहा कि भारत-रूस साझेदारी ने लगातार मजबूती और बदलती परिस्थितियों के अनुसार खुद को ढालने की क्षमता दिखाई है। उन्होंने कहा कि जटिल अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के बावजूद दोनों देशों के बीच संबंध लगातार गहरे हुए हैं। यह दोनों देशों के संबंधों को परिभाषित करने वाले आपसी हित और विश्वास को दर्शाता है।
रूसी समकक्ष लावरोव से करेंगे मुलाकात
विदेश मंत्रालय ने शनिवार को जारी एक बयान में कहा था कि अपनी यात्रा के दौरान जयशंकर रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव से भी मुलाकात करेंगे। इस दौरान दोनों नेता क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान करेंगे।
यह यात्रा जयशंकर और लावरोव की 22 जुलाई को मनीला में हुई मुलाकात के करीब एक महीने बाद हो रही है। दोनों नेताओं ने आसियान से संबंधित मंत्रिस्तरीय बैठकों से इतर मुलाकात की थी। इस दौरान उन्होंने द्विपक्षीय संबंधों की समीक्षा करने के साथ यूक्रेन संघर्ष और पश्चिम एशिया की स्थिति पर विचारों का आदान-प्रदान किया था।
जयशंकर ने लावरोव के साथ बैठक में क्षेत्र में भारतीय नाविकों की सुरक्षा को लेकर भारत की "गंभीर चिंता" भी दोहराई थी।
भारत और रूस के बीच लंबे समय से मजबूत और परखी हुई साझेदारी रही है। अक्टूबर 2000 में "भारत-रूस रणनीतिक साझेदारी की घोषणा" पर हस्ताक्षर होने के बाद दोनों देशों के संबंधों में महत्वपूर्ण बदलाव आया। इसके बाद राजनीतिक, सुरक्षा, रक्षा, व्यापार और अर्थव्यवस्था, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, संस्कृति और लोगों के बीच संबंधों सहित लगभग सभी क्षेत्रों में सहयोग बढ़ा है।
रूस के साथ किन मुद्दों पर होगी बातचीत?
रणनीतिक साझेदारी के तहत राजनीतिक और आधिकारिक दोनों स्तरों पर कई संस्थागत संवाद तंत्र काम करते हैं। इनका उद्देश्य दोनों देशों के बीच नियमित संपर्क और सहयोग से जुड़ी गतिविधियों पर आगे की कार्रवाई सुनिश्चित करना है।
भारत-रूस अंतर-सरकारी आयोग (आईआरआईजीसी) के दो हिस्से हैं। इनमें व्यापार, आर्थिक, वैज्ञानिक, तकनीकी एवं सांस्कृतिक सहयोग से संबंधित आईआरआईजीसी-टीईसी और सैन्य एवं सैन्य-तकनीकी सहयोग से जुड़ा आईआरआईजीसी-एमएंडएमटीसी शामिल है।
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