मेरठ: 44 भवनों पर ध्वस्तीकरण का आदेश बरकरार, सेंट्रल मार्केट के लोगों में बढ़ी चिंता

HIGHLIGHTS
- सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिलने के बाद मेरठ के सेंट्रल मार्केट के व्यापारियों और महिलाओं ने प्रदर्शन कर सरकार के खिलाफ नाराजगी जताई।
- अदालत ने सील किए गए 44 भवनों के ध्वस्तीकरण आदेश को बरकरार रखा और अवैध निर्माण को नियमित करने की मांग खारिज कर दी।
- फैसले के बाद व्यापारियों ने रोजगार और परिवार की आजीविका पर असर पड़ने की चिंता जताई, वहीं प्रशासन की आगे की कार्रवाई पर नजर है।
मेरठ: शास्त्री नगर स्थित सेंट्रल मार्केट प्रकरण में सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिलने के बाद मंगलवार को स्थानीय लोगों और व्यापारियों में नाराजगी देखने को मिली। बड़ी संख्या में महिलाओं और व्यापारियों ने सड़क पर उतरकर प्रदर्शन किया और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि लंबे समय से राहत की उम्मीद थी, लेकिन फैसला उनके पक्ष में नहीं आया, जिससे उनके सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है।
महिलाओं ने कहा- आश्वासन मिले, समाधान नहीं
प्रदर्शन कर रही महिलाओं का कहना था कि उन्हें उम्मीद थी कि सरकार और प्रशासन की ओर से कोई राहत मिलेगी, लेकिन अब स्थिति और मुश्किल हो गई है। उनका आरोप है कि लगातार आश्वासन दिए गए, मगर समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकला।
महिलाओं ने दावा किया कि 25 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले भवनों और बिना स्वीकृत नक्शे वाले निर्माणों पर कार्रवाई की बात कही जा रही है। उन्होंने कहा कि इसका असर हजारों परिवारों की आजीविका पर पड़ेगा।
44 सील भवनों पर ध्वस्तीकरण का आदेश बरकरार
सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान पहले से सील किए गए 44 भवनों को लेकर दिए गए ध्वस्तीकरण आदेश में बदलाव नहीं किया। अदालत ने कहा कि जिन आवासीय भवनों में नियमों के खिलाफ व्यावसायिक गतिविधियां संचालित की जा रही हैं, उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
कोर्ट ने अवैध निर्माण को नियमित करने की मांग को भी स्वीकार नहीं किया।
अवैध निर्माण पर सुप्रीम कोर्ट सख्त
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि नियमों का उल्लंघन कर किए गए निर्माणों को किसी समझौते या प्रक्रिया के जरिए वैध नहीं बनाया जा सकता। अदालत ने कहा कि अवैध निर्माण के मामलों में कानून के अनुसार कार्रवाई जरूरी है।
व्यापारियों और स्थानीय लोगों में निराशा
फैसले के बाद सेंट्रल मार्केट क्षेत्र में व्यापारियों और स्थानीय निवासियों के बीच मायूसी का माहौल रहा। लोगों का कहना है कि ध्वस्तीकरण की कार्रवाई और निर्माण मानकों को पूरा करना उनके लिए बड़ी चुनौती होगी।
कई व्यापारियों ने कहा कि यह मामला सिर्फ भवनों का नहीं, बल्कि उनके रोजगार और परिवारों के भविष्य से जुड़ा हुआ है।
25 मीटर श्रेणी के भवनों को भी नहीं मिली राहत
अदालत ने 25 मीटर श्रेणी के आवासीय भवनों को भी कोई विशेष छूट नहीं दी है। ऐसे भवनों को भी निर्धारित नियमों और निर्माण सीमा का पालन करना होगा। फैसले के बाद अब आवास एवं विकास परिषद की आगे की कार्रवाई पर सभी की नजर है।
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