बायजू रवींद्रन को सिंगापुर हाईकोर्ट से झटका, 6 महीने की सजा रोकने वाली याचिका खारिज

HIGHLIGHTS
- सिंगापुर हाईकोर्ट ने बायजू रवींद्रन की छह महीने की सजा रोकने वाली याचिका खारिज कर दी।
- रवींद्रन पर अदालत की अवमानना से जुड़ा मामला चल रहा है।
- बायजू संस्थापक विदेशी निवेशकों और कर्ज विवादों के कारण कानूनी मुश्किलों में घिरे हैं।
नई दिल्ली। संकट से जूझ रही एडटेक कंपनी बायजू के संस्थापक बायजू रवींद्रन को सिंगापुर हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। अदालत ने उनके खिलाफ सुनाई गई छह महीने की सजा पर रोक लगाने और आदेश को रद्द करने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया है।
इस फैसले के बाद यदि रवींद्रन सिंगापुर जाते हैं तो उन्हें अदालत के आदेश के अनुसार सजा की प्रक्रिया पूरी करनी पड़ सकती है।
सजा रोकने की मांग वाली याचिका हुई खारिज
रवींद्रन की कानूनी फर्म लजारेफ रे बार्स ने बताया कि सिंगापुर हाईकोर्ट ने 9 जुलाई को उनकी याचिका पर फैसला सुनाते हुए राहत देने से इनकार कर दिया।
यह मामला अदालत की अवमानना से जुड़ा है। सिंगापुर कोर्ट ने मई में रवींद्रन के खिलाफ छह महीने की सजा सुनाई थी। हालांकि, उस आदेश पर पहले अस्थायी रोक लगाई गई थी।
बायजू के लिए क्यों अहम है यह फैसला?
सिंगापुर कोर्ट का यह निर्णय रवींद्रन के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। कभी भारत के सबसे चर्चित स्टार्टअप संस्थापकों में शामिल रहे रवींद्रन ने थिंक एंड लर्न प्राइवेट लिमिटेड की शुरुआत की थी, जिसे दुनिया बायजू के नाम से जानती है।
ऑनलाइन शिक्षा के क्षेत्र में कंपनी ने तेजी से विस्तार किया और एक समय इसे भारत के सफल स्टार्टअप मॉडल के रूप में देखा जाता था। कंपनी की बढ़ती वैल्यू के साथ रवींद्रन अरबपतियों की सूची में भी शामिल हुए।
हालांकि, आक्रामक विस्तार, वित्तीय दबाव और कॉरपोरेट गवर्नेंस से जुड़े विवादों के बाद कंपनी गंभीर संकट में पहुंच गई। इसके बाद बायजू और उसके संस्थापकों के खिलाफ कई कानूनी मामले सामने आए।
रवींद्रन ने आरोपों से किया इनकार
रवींद्रन की ओर से पेश वकील जे. माइकल मैक्नट ने कहा कि उनका पक्ष है कि उन्होंने जानबूझकर या अनजाने में किसी भी अदालत के आदेश का उल्लंघन नहीं किया।
उन्होंने कहा कि रवींद्रन कानूनी प्रक्रिया के तहत उपलब्ध सभी विकल्पों का इस्तेमाल करते रहेंगे। हालांकि, इस मामले में सिंगापुर हाईकोर्ट की ओर से अभी कोई अलग टिप्पणी नहीं की गई है।
विदेशी निवेशकों के दावों से घिरे हैं रवींद्रन
बायजू रवींद्रन पर दुनियाभर के निवेशकों और ऋणदाताओं की ओर से कानूनी दबाव बना हुआ है। इनमें अमेरिका के ऋणदाता भी शामिल हैं, जो करीब 1.2 अरब डॉलर के कर्ज से जुड़े विवाद में कार्रवाई कर रहे हैं।
QIA की सहायक कंपनी ने दायर किया था मामला
सिंगापुर में रवींद्रन के खिलाफ मामला कतर इन्वेस्टमेंट अथॉरिटी (QIA) की एक सहयोगी कंपनी ने दायर किया है। QIA ने बायजू के एक फंडिंग राउंड में निवेश किया था।
QIA ने अदालत के फैसले का स्वागत करते हुए कहा है कि वह रवींद्रन के खिलाफ उपलब्ध सभी कानूनी विकल्पों का इस्तेमाल जारी रखेगी।
अभी सिंगापुर में नहीं हैं रवींद्रन
रवींद्रन के वकील के अनुसार, वह फिलहाल सिंगापुर में मौजूद नहीं हैं। यह भी स्पष्ट नहीं है कि वह भविष्य में कब सिंगापुर जाएंगे।
वकील ने कहा कि यदि रवींद्रन सिंगापुर आने की योजना बनाते हैं तो उन्हें अदालत में आगे की कानूनी प्रक्रिया अपनानी होगी। फिलहाल इस आदेश का तत्काल प्रभाव तभी पड़ेगा जब वह सिंगापुर लौटने का फैसला करेंगे।
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