मुजफ्फरनगर: हत्या के प्रयास मामले में 10 साल बाद सभी आरोपी बरी

HIGHLIGHTS
- लगभग एक दशक से अदालत में चल रहे हत्या के प्रयास के बहुचर्चित मामले में आखिरकार फैसला आ गया है।
- वर्ष 2016 में दर्ज इस केस में सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने तीनों आरोपितों को दोषमुक्त करते हुए बरी कर दिया।
- फैसले के बाद आरोपित पक्ष और उनके परिजनों ने राहत की सांस ली।
- मामला 7 जून 2016 का है, जब रास्ते को लेकर दो पक्षों के बीच विवाद के बाद मारपीट हुई थी।
- घटना के बाद तत्कालीन मंसूरपुर चेयरमैन श्याम पाल ने अपने भाई मैनपाल पर जानलेवा हमला किए जाने का आरोप लगाते हुए मामला दर्ज कराया था।…
मुजफ्फरनगर। लगभग एक दशक से अदालत में चल रहे हत्या के प्रयास के बहुचर्चित मामले में आखिरकार फैसला आ गया है। वर्ष 2016 में दर्ज इस केस में सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने तीनों आरोपितों को दोषमुक्त करते हुए बरी कर दिया। फैसले के बाद आरोपित पक्ष और उनके परिजनों ने राहत की सांस ली।
मामला 7 जून 2016 का है, जब रास्ते को लेकर दो पक्षों के बीच विवाद के बाद मारपीट हुई थी। घटना के बाद तत्कालीन मंसूरपुर चेयरमैन श्याम पाल ने अपने भाई मैनपाल पर जानलेवा हमला किए जाने का आरोप लगाते हुए मामला दर्ज कराया था। पुलिस ने इस संबंध में आईपीसी की धारा 307 सहित 323, 324, 504 और 506 के तहत केस दर्ज कर जांच शुरू की थी।

इस प्रकरण में हरिओम सैनी (ग्राम अभिपुरा), विपिन और रामकुमार (ग्राम जोहरा) को आरोपी बनाया गया था। मामला करीब 10 वर्षों तक अदालत में विचाराधीन रहा, जिसमें कई बार गवाहों की पेशी और सुनवाई हुई।
गवाहों और साक्ष्यों की हुई विस्तृत जांच
सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से कुल 10 गवाह अदालत में पेश किए गए। अदालत ने सभी गवाहों के बयान, केस डायरी और उपलब्ध साक्ष्यों का गहन परीक्षण किया। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद न्यायालय इस निष्कर्ष पर पहुंचा कि आरोप सिद्ध करने के लिए पर्याप्त और ठोस सबूत मौजूद नहीं हैं।
इसी आधार पर अदालत ने तीनों आरोपितों को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया।
फैसले के बाद राहत
फैसले के बाद अदालत परिसर में मौजूद आरोपित पक्ष के लोगों ने इसे न्याय की जीत बताते हुए संतोष व्यक्त किया। लंबे समय से चले आ रहे मुकदमे के समाप्त होने पर परिवारों ने राहत की सांस ली।
बचाव पक्ष की प्रतिक्रिया
आरोपितों की ओर से अधिवक्ता श्रवण कुमार, शुभम सहरावत, विशेष सहरावत और अभिषेक ने पैरवी की। अधिवक्ताओं ने कहा कि अदालत का निर्णय तथ्यों और साक्ष्यों पर आधारित है और लंबे समय से चल रहे मामले में अंततः न्याय मिला है।
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