निर्मला सीतारमण ने बताईं आर्थिक नीति की प्राथमिकताएं, कौशल विकास और आरएंडडी पर जोर

HIGHLIGHTS
- भारत की रणनीतिक जरूरतों के अनुरूप साझेदारी पर जोर दिया गया।
- रणनीतिक कच्चे माल की आपूर्ति में स्वायत्तता की बात कही गई।
- नेशनल क्रिटिकल मिनरल्स मिशन का उल्लेख किया गया।
नई दिल्ली। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने वैश्विक कारोबार की सामान्य गति को प्रभावित करने वाली भू-राजनीतिक परिस्थितियों को बढ़ती वैश्विक अनिश्चितता का एक प्रमुख कारण बताया। उन्होंने वैश्विक अनिश्चितता को स्थायी स्थिति बताते हुए भारत की भावी आर्थिक नीतियों की प्राथमिकताओं की भी जानकारी दी।
सीतारमण ने संकेत दिया कि सरकार की आने वाली नीतियों में नए युवा कामगारों को तैयार करने के साथ पहले से कार्यरत लोगों के कौशल विकास पर भी ध्यान दिया जाएगा। इसके अलावा निजी क्षेत्र के साथ मिलकर शोध और अनुसंधान पर खर्च बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि भारत आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ेगा, लेकिन अलग-अलग देशों के साथ अपनी रणनीतिक जरूरतों के अनुरूप साझेदारी करने से पीछे नहीं हटेगा। उनके मुताबिक, पिछले एक दशक में भारतीय इकोनॉमी की जो मजबूत नींव तैयार की गई है, उसे और मजबूत करते हुए वर्ष 2047 तक विकसित भारत बनाने का लक्ष्य है।
राष्ट्रीय सुरक्षा और रणनीतिक कच्चे माल पर जोर
कौटिल्य इकोनॉमिक कॉन्क्लेव को संबोधित करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि आने वाले वर्ष तैयारी की मांग करते हैं और भारत इस दौर में मजबूती के साथ प्रवेश कर रहा है। राष्ट्रीय सुरक्षा को सबसे बड़ी प्राथमिकता बताते हुए उन्होंने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण कच्चे माल की आपूर्ति में स्वायत्तता हासिल करने की बात कही। उन्होंने कहा कि यह सरकार की आर्थिक नीति के केंद्र में रहेगा।
इसी दिशा में सरकार ने नेशनल क्रिटिकल मिनरल्स मिशन, रेअर अर्थ कॉरिडोर और सेमीकंडक्टर मिशन जैसे कार्यक्रम शुरू किए हैं।
वैश्विक आर्थिक रिश्ते भी प्राथमिकता
दूसरी प्राथमिकता वैश्विक आर्थिक संबंधों को लेकर होगी। अमेरिका का नाम लिए बिना वित्त मंत्री ने कहा कि भू-राजनीतिक मतभेदों को व्यापार और निवेश की राह में दीवार नहीं बनना चाहिए। उन्होंने कारोबारी वादों के पालन, बाजार को खुला रखने और जहां तक संभव हो सेवाओं, उत्पादों, ऊर्जा और पूंजी के प्रवाह को स्थिर बनाए रखने की बात कही।
तीसरी प्राथमिकता कौशल विकास को लेकर होगी। वित्त मंत्री ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और नई तकनीकें काम करने के तरीकों और जरूरी योग्यताओं में बदलाव ला रही हैं। ऐसे में नए युवा कामगारों को तैयार करने के साथ पहले से काम कर रहे लोगों को कौशल उन्नयन और नई भूमिकाओं में जाने के लिए सहायता देनी होगी।
उन्होंने कहा कि उद्योग को प्रशिक्षण, अप्रेंटिसशिप और कार्यस्थल पर सीखने में बड़ी भूमिका निभानी होगी। इसका उद्देश्य तकनीक के इस्तेमाल से बेहतर रोजगार के अवसर पैदा करना और उत्पादकता बढ़ाना है।
आरएंडडी में निजी निवेश बढ़ाने पर जोर
चौथी प्राथमिकता के तहत वित्त मंत्री ने अनुसंधान में निजी निवेश की कमी को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि भारत का आरएंडडी व्यय सकल घरेलू उत्पाद का 0.83 प्रतिशत है, जबकि वैश्विक औसत 2.7 प्रतिशत है। कुल आरएंडडी खर्च में निजी क्षेत्र की हिस्सेदारी केवल 36 प्रतिशत है।
उन्होंने कहा कि निवेश का स्तर और निजी क्षेत्र की भागीदारी, दोनों बढ़ाना जरूरी है। इसके लिए भारत सरकार ने एक लाख करोड़ रुपये की रिसर्च, डेवलपमेंट एंड इनोवेशन योजना शुरू की है।
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