मोहन भागवत के सरकार बदलने वाले बयान पर कपिल सिब्बल का पलटवार, बोले- देश में बदलाव जरूरी

HIGHLIGHTS
- उन्होंने मध्यमवर्गीय परिवारों के युवाओं के लिए रोजगार और गरीबों के लिए शिक्षा के अवसरों की कमी पर चिंता जताई।
- सिब्बल ने अरुणाचल प्रदेश और पूर्वी लद्दाख में सीमा से जुड़े मुद्दों का उल्लेख करते हुए केंद्र सरकार पर सवाल उठाए।
- अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के भारत दौरे और व्यापार समझौते को लेकर दिए गए बयान पर भी सिब्बल ने आपत्ति जताई।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत की भारत में सरकार बदलने को लेकर की गई टिप्पणी पर राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने प्रतिक्रिया दी है। सिब्बल ने कहा कि भारत में सरकार बदलने की मांग करने वाले लोग लोकतांत्रिक तरीके से बदलाव चाहते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि भागवत इस बात को स्वीकार नहीं करना चाहते। सिब्बल के मुताबिक, देश में बदलाव की जरूरत है और लोग इसके लिए अपना मन बना चुके हैं। हालांकि, यह बदलाव कब और किस तरह होगा, इसका पता समय के साथ चलेगा।
भागवत की टिप्पणी पर सिब्बल ने क्या कहा?
सिब्बल ने भागवत के उस बयान पर सवाल उठाए, जिसमें उन्होंने भारत में सरकार बदलने की मांग की तुलना नेपाल, बांग्लादेश, अल्बानिया और फ्रांस में हाल में हुए घटनाक्रमों से की थी। सिब्बल ने कहा कि इन देशों में खुले विद्रोह के चलते हिंसा हुई, जिसका वह समर्थन नहीं करते। उन्होंने कहा कि भारत में लोग चुनाव और लोकतांत्रिक प्रक्रिया के माध्यम से सरकार बदलना चाहते हैं।
सिब्बल ने जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन का जिक्र करते हुए कहा कि वहां युवाओं ने शांतिपूर्ण तरीके से विरोध किया था। उनके पास न हथियार थे और न ही पत्थर। उन्होंने यह भी कहा कि प्रदर्शनकारियों ने भूख हड़ताल की थी।
प्रदर्शन में हिंसा और पत्थरों से भरे ट्रक को लेकर क्या आरोप लगाए?
सिब्बल ने आशंका जताई कि प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा के पीछे बाहरी एजेंसियों की भूमिका हो सकती है। उन्होंने सवाल किया कि प्रदर्शन स्थल पर पत्थरों से भरा ट्रक कहां से आया और उसे वहां कौन लेकर पहुंचा। सिब्बल ने कहा कि इस मामले की अब तक जांच नहीं हुई है। उन्होंने यह भी कहा कि पुलिस और कानून-व्यवस्था उपराज्यपाल के माध्यम से केंद्र सरकार के नियंत्रण में हैं। हालांकि, बाहरी एजेंसियों की भूमिका और पत्थरों से भरे ट्रक को लेकर लगाए गए आरोपों की इन बयानों से पुष्टि नहीं होती।
आरएसएस पर सिब्बल ने और क्या आरोप लगाए?
सिब्बल ने कहा कि आरएसएस पहले भी सरकार बदलने की प्रक्रिया में भूमिका निभा चुका है। उन्होंने आरोप लगाया कि संघ ने पहले अरविंद केजरीवाल का समर्थन किया था, जिससे कांग्रेस के नेतृत्व वाली संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) सरकार के पतन में योगदान मिला।
सिब्बल ने कहा कि नरेंद्र मोदी चुनाव जीतकर सत्ता में आए थे और उन्हें सत्ता में आए 12 साल हो चुके हैं। उन्होंने सवाल किया कि यदि सरकार बदलने से बुनियादी समस्याओं का समाधान नहीं होता, तो आरएसएस ने पहले केजरीवाल का समर्थन क्यों किया था। ये आरोप सिब्बल ने राजनीतिक संदर्भ में लगाए हैं।
बेरोजगारी, शिक्षा और सीमा सुरक्षा पर सिब्बल ने क्या सवाल उठाए?
सिब्बल ने आरोप लगाया कि भागवत देश की प्रमुख समस्याओं पर बात नहीं कर रहे हैं। उन्होंने स्कूलों में शिक्षा की स्थिति, बेरोजगारी और युवाओं के लिए अवसरों की कमी जैसे मुद्दे उठाए। उन्होंने मतदाता सूचियों में कथित गड़बड़ियों, अरुणाचल प्रदेश और पूर्वी लद्दाख में सीमा पर घुसपैठ तथा युवाओं, शिक्षाविदों और विपक्षी नेताओं को हिरासत में लिए जाने का भी उल्लेख किया।
सिब्बल ने कहा कि मध्यमवर्गीय परिवारों के बच्चों को रोजगार नहीं मिल रहा है, जबकि गरीबों को शिक्षा के पर्याप्त अवसर नहीं मिल पा रहे हैं। उन्होंने देश को विदेशी ताकतों से अस्थिर किए जाने की आशंका जताने वाली भागवत की टिप्पणी पर भी सवाल उठाए।
भागवत ने सरकार बदलने की मांग पर क्या कहा था?
भागवत ने मंगलवार को नागपुर में आरएसएस के वार्षिक विजयादशमी उत्सव के दौरान कहा था कि सरकार बदलने के लिए होने वाले आंदोलन बुनियादी समस्याओं का समाधान नहीं करते। उन्होंने आशंका जताई थी कि ऐसे आंदोलन राजनीतिक हितों को साधने का जरिया बन सकते हैं और समाज में विभाजन बढ़ा सकते हैं।
नेपाल, बांग्लादेश, फ्रांस और अल्बानिया के घटनाक्रमों का उदाहरण देते हुए भागवत ने कहा था कि सरकार बदलने से हालात बदलने का दावा अक्सर पूरा नहीं होता।
सिब्बल ने भारत-तिब्बत सीमा पुलिस के महानिदेशक शत्रुजीत कपूर की अरुणाचल प्रदेश में कई जगहों पर आमने-सामने की स्थिति बने रहने संबंधी टिप्पणी का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने सीमा के मामले में सरकार पर कमजोर होने का आरोप लगाया।
अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो के भारत दौरे को लेकर भी सिब्बल ने सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि विदेश मंत्री को उनसे मिलने के लिए मुंबई जाना पड़ा और रुबियो ने 99 प्रतिशत व्यापार समझौता पूरा होने की घोषणा की। सिब्बल ने इस घटनाक्रम को भारत के लिए अपमानजनक बताया।
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