सीमा पार आतंकवाद पर कोई समझौता नहीं: जयशंकर

HIGHLIGHTS
- विदेश मंत्री एस.
- जयशंकर ने शनिवार को स्पष्ट शब्दों में कहा कि सीमा पार फैलाए जा रहे आतंकवाद को किसी भी हाल में स्वीकार नहीं किया जा सकता।
- उन्होंने कहा कि यह अंतरराष्ट्रीय संबंधों और कूटनीति की बुनियादी मर्यादाओं के खिलाफ है, इसलिए आतंकवाद के प्रति दुनिया को एक जैसा और सख्त रुख अपनाना चाहिए।
- भारत-अरब देशों के विदेश मंत्रियों की दूसरी बैठक को संबोधित करते हुए जयशंकर ने कहा कि जिन समाजों को आतंकवाद निशाना बनाता है, उन्हें अपनी सुरक्षा का पूरा अधिकार है और वे स्वाभाविक रूप से उसका इस्तेमाल भी करें…
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शनिवार को स्पष्ट शब्दों में कहा कि सीमा पार फैलाए जा रहे आतंकवाद को किसी भी हाल में स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि यह अंतरराष्ट्रीय संबंधों और कूटनीति की बुनियादी मर्यादाओं के खिलाफ है, इसलिए आतंकवाद के प्रति दुनिया को एक जैसा और सख्त रुख अपनाना चाहिए।
भारत-अरब देशों के विदेश मंत्रियों की दूसरी बैठक को संबोधित करते हुए जयशंकर ने कहा कि जिन समाजों को आतंकवाद निशाना बनाता है, उन्हें अपनी सुरक्षा का पूरा अधिकार है और वे स्वाभाविक रूप से उसका इस्तेमाल भी करेंगे।
पश्चिम एशिया भारत के लिए रणनीतिक रूप से अहम
विदेश मंत्री ने कहा कि मौजूदा वैश्विक राजनीतिक हालात का असर पश्चिम एशिया में साफ दिखाई देता है। बीते एक साल में इस क्षेत्र में कई बड़े बदलाव हुए हैं, जिनका प्रभाव केवल वहां तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत जैसे पड़ोसी देशों पर भी पड़ता है। उन्होंने कहा कि इन घटनाक्रमों का भारत और अरब देशों के आपसी रिश्तों पर भी गहरा असर पड़ता है।
जयशंकर ने गाजा और सूडान में जारी संघर्षों के साथ-साथ यमन, सीरिया और लीबिया की स्थिति का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इन परिस्थितियों को देखते हुए सभी संबंधित देशों का साझा लक्ष्य शांति, स्थिरता और समृद्धि को मजबूत करना होना चाहिए।
आतंकवाद पर दोहरा मापदंड नहीं चलेगा
अपने भाषण में उन्होंने आतंकवाद से जुड़ी वैश्विक चुनौतियों पर चिंता जताते हुए कहा कि खासतौर पर सीमा पार आतंकी गतिविधियां बेहद गंभीर मुद्दा हैं। यह टिप्पणी पाकिस्तान की ओर इशारा मानी जा रही है। उन्होंने दोहराया कि आतंकवाद का शिकार बने देशों को आत्मरक्षा का अधिकार है और यह अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत स्वाभाविक है।
जयशंकर ने कहा कि आतंकवाद जैसी वैश्विक समस्या से निपटने के लिए देशों के बीच सहयोग और समन्वय को और मजबूत करना होगा। उन्होंने साफ किया कि आतंक के खिलाफ कोई नरमी नहीं होनी चाहिए और पूरी दुनिया में इसके लिए एक समान नियम लागू होने चाहिए।
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