असम में बाढ़ से 1.12 लाख से ज्यादा लोग प्रभावित, 441 गांव अब भी जलमग्न

HIGHLIGHTS
- गोलाघाट में 65 हजार से अधिक लोग बाढ़ से प्रभावित
- धनसिरी नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है
- पांच जिलों में 92 राहत शिविर और वितरण केंद्र संचालित
असम। राज्य में बुधवार को भी बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है। चार जिलों में 1.12 लाख से अधिक लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। पहले से बाढ़ की चपेट में आए कई इलाकों में आने वाले समय में और बारिश होने का अनुमान है।
एएसडीएमए ने क्या बताया?
असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एएसडीएमए) के एक अधिकारी के अनुसार, कई नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। इससे नए इलाकों में भी बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। आईएमडी के गुवाहाटी केंद्र ने चराइदेव, डिब्रूगढ़, जोरहाट, शिवसागर और तिनसुकिया के कुछ हिस्सों में गरज के साथ बारिश और मध्यम से भारी बारिश की संभावना जताई है। इन इलाकों में बिजली गिरने का भी अनुमान है।
बाढ़ में कितने लोगों की मौत हुई?
अधिकारी ने बताया कि गोलाघाट जिले के नुमालीगढ़ में धनसिरी नदी की बाढ़ की स्थिति बेहद गंभीर बनी हुई है। नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है, इसलिए लोगों को नदी से दूर रहने की सलाह दी गई है।
एएसडीएमए के दैनिक बाढ़ बुलेटिन के मुताबिक, बुधवार को किसी नई मौत की सूचना नहीं मिली। इस साल बाढ़ से मरने वालों की संख्या 101 बनी हुई है।
सबसे ज्यादा प्रभावित जिला कौन सा?
बुलेटिन के अनुसार गोलाघाट, जोरहाट, नगांव और शिवसागर जिलों में बाढ़ से 1,12,700 से अधिक लोग प्रभावित हैं। इनमें गोलाघाट सबसे ज्यादा प्रभावित है, जहां 65,000 से अधिक लोग बाढ़ की चपेट में हैं। इसके बाद शिवसागर में करीब 20,000 और नगांव में 16,000 से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं।
फसलों को कितना नुकसान हुआ?
प्रशासन की ओर से पांच जिलों में 92 राहत शिविर और राहत वितरण केंद्र संचालित किए जा रहे हैं। इनसे 30,205 प्रभावित लोगों को सहायता मिल रही है।
प्राधिकरण के मुताबिक, राज्य में अभी भी कम से कम 441 गांव पानी में डूबे हुए हैं। बाढ़ से 10,879.03 हेक्टेयर फसल भूमि को नुकसान पहुंचा है।
कई जिलों में बाढ़ के पानी से तटबंधों, सड़कों, पुलों और अन्य बुनियादी ढांचे को भी नुकसान हुआ है। एएसडीएमए के अनुसार, बाढ़ से राज्यभर में 31,650 घरेलू पशु और मुर्गी पालन प्रभावित हुए हैं।
पुनर्वास के लिए कितने रुपये की जरूरत?
असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने बुधवार को कहा कि बाढ़ की नई लहर से प्रभावित जिलों में संपत्तियों की मरम्मत और बाढ़ प्रभावित लोगों के पुनर्वास के लिए कम से कम 1,000 करोड़ रुपये की जरूरत होगी।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पुनर्वास की प्रक्रिया में पूरी सहायता का आश्वासन दिया है।
मुख्यमंत्री सरमा ने क्या कहा?
सरमा ने कहा कि स्थायी राहत उपलब्ध कराने के लिए 9 अगस्त से राहत आकलन अभियान शुरू किया गया है। शुरुआती रिपोर्ट के मुताबिक, अब तक 8,000 से अधिक परिवारों का आकलन किया जा चुका है और करीब 150 करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान लगाया गया है।
उन्होंने बताया कि यह सर्वेक्षण 30 अगस्त तक जारी रहेगा। इसमें हालिया बाढ़ से सबसे ज्यादा प्रभावित ऊपरी जिलों के 50,000 से 60,000 परिवारों को शामिल किए जाने की उम्मीद है।
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