वंदे मातरम पर सियासी घमासान: BJP ने कांग्रेस के फैसले को नकारा

HIGHLIGHTS
- बैठक में वंदे मातरम् के सम्मान को लेकर प्रस्ताव पारित किया गया।
- संबित पात्रा ने कांग्रेस के दो छंद गाने के फैसले पर सवाल उठाए।
- भाजपा ने 1937 के कांग्रेस प्रस्ताव का मुद्दा उठाया।
नई दिल्ली। भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन ने शनिवार को पार्टी के नवनियुक्त राष्ट्रीय पदाधिकारियों के साथ पहली बार बैठक की। बैठक के बाद भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने बताया कि पदाधिकारियों की बैठक में पहला प्रस्ताव वंदे मातरम् के सम्मान को लेकर पारित किया गया। इस दौरान उन्होंने कांग्रेस के वंदे मातरम् के केवल दो छंद गाने के फैसले पर निशाना साधा।
संबित पात्रा ने कहा कि वंदे मातरम् के बीज मंत्र के मूल में देश और देशभक्ति है। उन्होंने कांग्रेस नेता सोनिया गांधी की ओर से वंदे मातरम् को रोकने की घटना का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि यह वंदे मातरम् की 150वीं वर्षगांठ है। 15 अगस्त 2026 को लाल किले से छह श्लोकों वाला संपूर्ण वंदे मातरम् गाया गया, लेकिन उसी दिन कांग्रेस कार्यालय में एक अशोभनीय घटना हुई।
कांग्रेस पर वंदे मातरम् के अपमान का आरोप
भाजपा प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी की मौजूदगी में तिरंगा फहराए जाने के दौरान सोनिया गांधी ने दो श्लोकों के बाद वंदे मातरम् रोकने का इशारा किया।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने इस मामले में डैमेज कंट्रोल की कोशिश की। 19 अगस्त को कांग्रेस कार्य समिति की बैठक में प्रस्ताव आया कि पार्टी वंदे मातरम् के केवल दो श्लोक गाएगी। पात्रा ने आरोप लगाया कि कांग्रेस वंदे मातरम् का विभाजन करना चाहती है।
उन्होंने कहा कि 1937 में केवल दो छंद गाने का फैसला क्यों लिया गया था, यह सभी जानते हैं। वंदे मातरम् के 100 साल पूरे होने के समय कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार में देश में आपातकाल लगा हुआ था। वहीं, इसकी 150वीं वर्षगांठ पर सदन में चर्चा हो रही है। पात्रा ने कहा कि आजादी से पहले ब्रिटिश सरकार वंदे मातरम् को रोकती थी और आज कांग्रेस वही काम कर रही है।
भाजपा का दावा- नेहरू के फैसले ने विभाजन का बीज बोया
संबित पात्रा ने कहा कि 1923 में आंध्र प्रदेश में कांग्रेस के अधिवेशन में वंदे मातरम् का संपूर्ण गायन होना था, लेकिन कांग्रेस अध्यक्ष मौलाना मोहम्मद अली ने वॉकआउट किया था।
उन्होंने कहा कि इसके बाद 1937 में पहली बार जवाहरलाल नेहरू के कहने पर वंदे मातरम् को विभाजित कर उसका एक हिस्सा गाने का प्रस्ताव लाया गया। पात्रा ने दावा किया कि 1938 में नेहरू ने मोहम्मद अली जिन्ना को लिखी चिट्ठी में 14 मांगों के सामने घुटने टेक दिए और वंदे मातरम् के संपूर्ण पठन को रोक दिया।
भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि 1937 में पंडित नेहरू की ओर से बोया गया तुष्टीकरण का बीज आगे चलकर देश के विभाजन की वजह बना। उन्होंने 15 अगस्त को राहुल गांधी और सोनिया गांधी के व्यवहार तथा कांग्रेस कार्य समिति की ओर से 1937 के प्रस्ताव को दोबारा पारित किए जाने का भी जिक्र किया।
पात्रा ने कहा कि भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने स्पष्ट तौर पर कहा है कि कांग्रेस विभाजन का जो बीज बोने की कोशिश कर रही है, उसे ऐसा नहीं होने दिया जाएगा।
वंदे मातरम् पर महात्मा गांधी के पत्र का किया जिक्र
संबित पात्रा ने वंदे मातरम् को लेकर महात्मा गांधी के एक पत्र का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि गांधी ने वंदे मातरम् को बंगाल विभाजन के दिनों में हिंदुओं और मुसलमानों के बीच एक शक्तिशाली युद्धघोष और साम्राज्यवाद विरोधी नारा बताया था।
पात्रा ने कहा कि महात्मा गांधी ने लिखा था कि जब उन्होंने पहली बार वंदे मातरम् सुना और गाया, तो वह इससे मंत्रमुग्ध हो गए थे और उन्होंने इसके साथ शुद्धतम राष्ट्रीय भावना को जोड़ा था। उन्होंने कहा कि गांधी के अनुसार उन्हें कभी यह विचार नहीं आया कि यह हिंदुओं का गीत है या केवल हिंदुओं के लिए है।
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