विदेशों में छिपे 70+ भगोड़ों की लोकेशन चिह्नित, एक दशक की सबसे बड़ी सफलता

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, पिछले एक वर्ष में भारतीय जांच एजेंसियों ने विदेशों और देश में छिपे भगोड़ों के खिलाफ बड़ी सफलता हासिल की है। केंद्रीय सरकार की रिपोर्ट के मुताबिक, विदेशों में 70 से अधिक भगोड़ों का पता लगाया गया, जबकि भारत में छिपे 203 अन्य भगोड़ों की लोकेशन भी चिह्नित की गई।
विदेशों से 27 भगोड़े वापस लाए गए
रिपोर्ट में बताया गया है कि विदेशी ठिकानों पर छिपे भगोड़ों को सिर्फ ट्रेस ही नहीं किया गया, बल्कि पिछले वित्तीय वर्ष में 27 अपराधियों को भारत वापस लाया गया। इसके लिए CBI ने गृह मंत्रालय और विदेश मंत्रालय के साथ मिलकर काम किया।
कानूनी सहायता और लेटर रॉजेटरी
वित्तीय वर्ष 2024-25 के दौरान भारत ने कुल 74 “लेटर रॉजेटरी” (विदेशों से कानूनी मदद के अनुरोध) भेजे। इनमें 54 मामले CBI के थे, जबकि 20 राज्य पुलिस और अन्य केंद्रीय एजेंसियों से जुड़े थे। 47 अनुरोध पूरी तरह पूरा किए गए, जबकि 29 मामलों को आंशिक कार्यवाही के बाद बंद कर दिया गया। 31 मार्च 2025 तक 533 मामले विभिन्न देशों में लंबित हैं। वहीं, भारत को भी 32 कानूनी अनुरोध प्राप्त हुए।
भगोड़ों पर इंटरपोल का शिकंजा
भारतीय एजेंसियों ने विदेशों में छिपे भगोड़ों को पकड़ने के लिए इंटरपोल नोटिस जारी किए हैं। इसमें 126 रेड नोटिस शामिल हैं, जो आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए दुनिया भर की पुलिस से मदद लेने में काम आती हैं। इसके अलावा:
-
ब्लू नोटिस (89): संदिग्धों की पहचान और ठिकाना पता करने के लिए
-
येलो नोटिस (24): लापता लोगों की तलाश
-
ब्लैक नोटिस (7): अज्ञात शवों की पहचान
-
ग्रीन नोटिस (1): समाज के लिए खतरनाक अपराधियों की चेतावनी
CBI का ग्लोबल ऑपरेशन
CBI के ग्लोबल ऑपरेशंस सेंटर (GOC) के जरिए विदेशी पुलिस और इंटरपोल के संपर्क में रहते हुए, भगोड़ों की लोकेशन मिलने पर कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी जाती है। इसी अवधि में, CBI ने 22,200 से अधिक भारतीय नागरिकता छोड़ने के आवेदनों पर रिपोर्ट तैयार की।
पासपोर्ट सुरक्षा और निगरानी
पासपोर्ट के दुरुपयोग को रोकने के लिए कदम उठाए गए हैं। इंटरपोल के डेटाबेस SLTD में अब तक 1.91 लाख से अधिक चोरी या रद्द किए गए भारतीय पासपोर्ट की जानकारी अपलोड की जा चुकी है। 31 मार्च 2025 तक दुनिया भर में ऐसे पासपोर्ट के संदिग्ध इस्तेमाल के 30 मामले पकड़े गए।
इस रिपोर्ट से यह स्पष्ट है कि भारतीय जांच एजेंसियां देश और विदेश में भगोड़ों को ट्रेस करने और उन्हें न्याय के कटघरे में लाने में लगातार सक्रिय हैं।
Comments0
Leave a comment
Join the conversation — your email will not be published.





















Reader comments
No comments yet
Be the first to share your perspective on this story.